महिलाओं के लिए प्रयुक्त अपमानजनक शब्दों के प्रति रोष जताने पत्र लेखन स्पर्धा में ललिता पांडे प्रथम

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भिलाई। अखिल भारतीय उत्कृष्ठ बहुद्देशीय संस्था द्वारा रुआंबांधा में युवाओं के लिए पत्र लेखन स्पर्धा का आयोजन किया गया। महिलाओं के लिए प्रयुक्त अपमानजनक शब्दों, गालियों की प्रयोग की प्रवृत्ति के प्रति रोष जताने व शासन से कड़ी कार्यवाही करने विषयक पत्रों के लेखन के इस स्पर्धा में 41 युवाओं ने सहभागिता दी। कैंप-1 की ललिता पांडे ने प्रथम, दुर्ग की अधिवक्ता राखी गुप्ता ने द्वितीय तथा रिसाली की सुधा गुप्ता ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। रूआबांधा बस्ती के बुद्देश्वर बंजारे व कैंप-1 की सोनम को सांत्वना पुरस्कार के लिए चुना गया। मुख्य अतिथि पूजा चंद्राकर ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। शिक्षाविद् डा डीएन शर्मा व सामाजिक कार्यकर्ता मिथिला खिचारिया ने प्रविष्टियों का मूल्यांकन किया।

आरंभ में संस्था की अध्यक्ष शानू मोहनन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रतिभागियों के उत्साह की सराहना की। निर्णायक मिथिला खिचरिया ने प्रतिभागियों द्वारा पत्रों के माध्यम से व्यक्त भावनाओं की प्रशंसा की। शिक्षाविद् डा शर्मा ने युवाओं को हर रोज कुछ पढ़ने व एक-दो पृष्ठ लेखन का नियमित अभ्यास करने कहा। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में बोलचाल की भाषा में स्त्री सूचक गालियों का प्रयोग उपयोगकर्ता की रुग्ण मानसिकता का परिचायक है। इस अवसर पर डॉ खिचरिया, सागरिका पाणीग्रही, सुरजीत मेहता, उपासना साहू, प्रेम साहू, विवेक प्रकाश शर्मा, सुधा गुप्ता, स्वाति जोशी सहित अन्य उपस्थित रहे।

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