

० अनवर ढेबर और पूर्व IAS अनिल टुटेजा से जुड़े नेटवर्क पर शिकंजा, 2883 करोड़ की अवैध कमाई का दावा
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित घोटाले से जुड़ी 1000 करोड़ रुपये से अधिक बाजार मूल्य की संपत्तियों को अटैच कर दिया है। कार्रवाई के दायरे में कारोबारी अनवर ढेबर, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और उनसे जुड़े लोगों की संपत्तियां आई हैं। ईडी का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच शराब सिंडिकेट ने आबकारी व्यवस्था में कथित हेरफेर कर 2883 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की।

ईडी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत तीन अलग-अलग अनंतिम कुर्की आदेश जारी किए गए हैं। इनमें रायपुर की चर्चित ढेबर सिटी की जमीनों से लेकर गोवा के अंजुना स्थित लग्जरी होटल वेस्टिन गोवा तक की संपत्तियां शामिल हैं।
शराब सिंडिकेट ने ऐसे बिछाया था खेल
जांच एजेंसी का आरोप है कि तत्कालीन आबकारी व्यवस्था में प्रभावशाली अधिकारियों, डिस्टलरी संचालकों और निजी कंपनियों की मिलीभगत से एक संगठित सिंडिकेट बनाया गया। इस नेटवर्क के जरिए शराब की खरीद दरों में कृत्रिम बढ़ोतरी, अवैध शराब निर्माण, नकली होलोग्राम और लाइसेंस आवंटन में कथित हेरफेर कर भारी मुनाफा कमाया गया।
ढेबर सिटी और कई बेनामी जमीनें कुर्क
ईडी ने विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी संपत्तियों को भी अटैच किया है। जांच में विकास अग्रवाल को सिंडिकेट का वित्तीय प्रबंधक बताया गया है, जो कथित तौर पर विभिन्न स्रोतों से कमीशन एकत्र कर अनवर ढेबर तक पहुंचाता था। रायपुर में ढेबर सिटी के कई भूखंडों सहित विभिन्न कंपनियों के नाम पर खरीदी गई जमीनों को अपराध से अर्जित आय का हिस्सा मानते हुए कुर्क किया गया है।
गोवा का लग्जरी होटल भी जांच के घेरे में
कार्रवाई के दूसरे चरण में गोवा के अंजुना स्थित पांच सितारा होटल वेस्टिन गोवा को भी अटैच किया गया है। ईडी का दावा है कि इस होटल के अधिग्रहण में शराब घोटाले से अर्जित धन का इस्तेमाल किया गया था। जांच एजेंसी के मुताबिक होटल में करीब 110 करोड़ रुपये का निवेश कथित रूप से अवैध आय से किया गया।
तीन कंपनियों की संपत्तियां भी जब्त
ईडी ने तीन एफएल-10ए लाइसेंसधारी कंपनियों के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड भी कुर्क किए हैं। एजेंसी का आरोप है कि इन कंपनियों को अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा सिंडिकेट को देने के लिए मजबूर किया गया था।
आरोपियों की संख्या हुई 85
मामले में ईडी ने विशेष अदालत में छठी अनुपूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है। इसमें चार नए आरोपियों के नाम जोड़े गए हैं। इसके साथ ही इस प्रकरण में आरोपियों की कुल संख्या 85 हो गई है।
क्या है पूरा शराब घोटाला ?
ईडी और ईओडब्ल्यू की जांच के अनुसार कथित घोटाला तीन स्तरों पर संचालित हुआ—
डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी कमीशन वसूली।
नकली होलोग्राम के जरिए सरकारी दुकानों से अवैध शराब की बिक्री।
शराब सप्लाई जोन के आवंटन में कथित हेरफेर कर अवैध उगाही।
जांच एजेंसियों का दावा है कि इन तरीकों से हजारों करोड़ रुपये का अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया गया। हालांकि मामले में आरोपियों की ओर से अपने-अपने स्तर पर आरोपों का खंडन भी किया जाता रहा है और प्रकरण न्यायिक प्रक्रिया में विचाराधीन है।
छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में शुमार इस मामले में ED की कार्रवाई ने एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है।
