CGPSC भर्ती घोटाला: CBI के बाद ED की एंट्री, पूर्व चेयरमैन टामन सोनवानी, पूर्व सचिव जेके ध्रुव समेत 5 ठिकानों पर छापेमारी

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रायपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सक्रिय हो गया है। सीबीआई की कार्रवाई के बाद बुधवार को ईडी ने एक साथ पांच ठिकानों पर दबिश देकर दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच शुरू कर दी। कार्रवाई से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

ईडी की टीम ने पूर्व CGPSC चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, राज्यपाल के पूर्व सचिव एवं रिटायर्ड IAS अमृत खलको और आरोपी ललित गणवीर के भाई भूपेंद्र गणवीर के ठिकानों पर छापेमारी की।

भिलाई से राजनांदगांव तक एक्शन, खंगाले जा रहे दस्तावेज

जानकारी के मुताबिक, ईडी की अलग-अलग टीमों ने भिलाई सेक्टर-10 स्थित जेके ध्रुव के निवास, तालपुरी स्थित अमृत खलको के घर, रायपुर में आरती वासनिक के आवास, राजनांदगांव के शिक्षक कॉलोनी में भूपेंद्र गणवीर के घर और सरबदा गांव स्थित टामन सोनवानी के ठिकाने पर जांच की। अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से पूछताछ के साथ महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले।

अमृत खलको के परिवार पर भी सवाल

पूर्व आईएएस अधिकारी अमृत खलको के बेटे निखिल खलको और बेटी नेहा खलको का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ था। भर्ती प्रक्रिया में नाम सामने आने के बाद उन्हें राज्यपाल सचिवालय में मिली संविदा नियुक्ति से भी हटाया गया था।

2020-22 की भर्ती परीक्षाओं पर उठे थे सवाल

CGPSC भर्ती घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित परीक्षाओं और इंटरव्यू प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि प्रभावशाली अधिकारियों और नेताओं के रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में हेरफेर कर योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया गया।

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CBI जांच में हुए थे कई बड़े खुलासे

जुलाई 2023 में राज्य सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंपी थी। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी ने अपने परिजनों को लाभ पहुंचाने के लिए चयन प्रक्रिया में बदलाव किए। वहीं प्रश्नपत्र लीक और पद के दुरुपयोग के आरोप भी सामने आए।

जेल में बंद हैं कई आरोपी

इस मामले में पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, पूर्व सचिव जेके ध्रुव, आरती वासनिक, ललित गणवीर समेत कई आरोपी पहले ही गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं। वहीं कुछ आरोपी जमानत पर बाहर हैं।

ED की जांच से बढ़ सकती हैं मुश्किलें

सीबीआई की आपराधिक जांच के बाद अब ईडी की एंट्री से मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय लेन-देन के पहलुओं की भी जांच होगी। ऐसे में आने वाले दिनों में भर्ती घोटाले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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