फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद अब CISF लिखी बसों में ढोने लगे स्टाफ

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दुर्ग न्यूज़ (राजनांदगांव), 12 अप्रैल। परिवहन आयुक्त के आदेश पर पूरी कार्यवाही केवल राजनांदगांव और बिलासपुर में की गई। रायपुर में कोई कार्यवाही करने से आरटीओ और परिवहन विभाग के भी हाथ कांपते दिखे। जायसवाल निको, निर्वाणा स्टील लिमिटेड, मोनेट की स्टाफ बस आज भी परिवहन विभाग की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब रही। फर्जीवाड़ा करके CISF लिखी बस में स्टाफ को बिठाकर परिवहन किया गया।

 

चौंकाने वाली बात यह है कि जायसवाल निको में कालातीत और आरटीओ टैक्स घोटाला करने वाली स्टाफ बसों की खबरें प्रकाशित होने के बाद ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने कार्रवाई की औपचारिकता दिखाते हुए राजनांदगांव और बिलासपुर में ही चेकिंग किये और रायपुर के उद्योग समूहों को एक तरह से क्लीन चिट दे दिए। पत्रकारों की पड़ताल में विभागीय कार्रवाई की औपचारिकता सामने आ गई और आज भी ये गाड़िया रायपुर में कंपनियों के स्टाफ को लेती ले जाती दिखीं।

 

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जायसवाल निको इंडस्ट्रीस ने स्टाफ बस घोटाले की खबर के खुलासे के बाद भी फर्जीवाड़ा करते हुए स्कूल बसों और यात्री बस को हटाकर सीआईएसएफ लिखी हुई बसों का नंबर, CG07CL0167, CG07CL0168, CG07CL0166 का संचालन किया है जिस पर स्टाफ का परिवहन करवाया गया।

 

इन बसों का परमिट नही है आरटीओ ने कोई चेकिंग नही की है आरटीओ से मिलीभगत करके स्कूल बसों को बदल कर दूसरी बस का उपयोग किया गया है लेकिन जिन बसों को भी चलाया जा रहा है बिना स्टाफ परमिट के ये बसे भी नही चल सकती। इस तरह कंपनियां आरटीओ को बेवकूफ बना रही हैं। सूत्रों के हिसाब से ये जो बस जिसमे सीआईएसएफ लिखा हुआ है वह बीएसपी भिलाई में चलने वाली बस है।

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दूसरी बात यह है कि निको प्लांट में ये सीआईएसएफ लिखी हुई बस इसलिए चला रहा है ताकि कोई भी आरटीओ स्टाफ इस बस को रोके नहीं। इनके झांसे में परिवहन विभाग आकर रायपुर में कोई कार्रवाई नहीं किया। चेकिंग करने वाले CISF लिखी बस को सरकारी समझकर रोके भी नहीं। ये धोखाधड़ी है और तो और रिलायंस ट्रेवल्स वाला दो बस ऐसी चला रहा है जो दुर्ग से रायपुर परमिट की बस है। जिसमे सुमीत लिखा हुआ है। ये बस दुर्ग से रायपुर सवारी लाने ले जाने का परमिट है न कि निको फैक्ट्री के स्टाफ को दुर्ग से सिलतरा तक लाने का है।

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