गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM)एक घंटा पहले
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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में स्थित प्रदेश के सबसे पुराने मौसम विभाग केंद्र की हालत बेहद खस्ता है। मध्य भारत के सबसे ठंडे इलाकों में शुमार अमरकंटक और यहां से करीब 300 किलोमीटर के दायरे में मौसम के पूर्वानुमान के लिए करीब 125 साल पहले पेंड्रारोड में मौसम विज्ञान केंद्र स्थापित किया गया था। लेकिन अंग्रेजों के जमाने में स्थापित ये केंद्र दुर्दशा का शिकार है।
इसे आवश्यक रूप से अपग्रेड किया गया। इसके बाद साल 1993 में रायपुर के मौसम विज्ञान केंद्र को अपग्रेड करने के लिए यहां से आरएस और आरडब्ल्यू उपकरणों को वहां स्थानांतरित कर दिया गया। ऊपरी वायुमंडल के अवलोकन का काम रायपुर के मौसम विज्ञान केंद्र से शुरू कर दिया गया। इसके बाद से पेंड्रा में अंग्रेजों के जमाने के उपकरणों से ही काम चलाया जा रहा है। पेंड्रा के मौसम विज्ञान केंद्र में केवल अधिकतम और न्यूनतम तापमानों के साथ वर्षा मापने का उपकरण ही बच गया है, जबकि प्रदेश के 7 स्थानों में शुमार इस केंद्र का महत्व कृषि के लिए पूर्वानुमानों के लिए बहुत ज्यादा है।

इसके बावजूद यहां आज भी पुराने उपकरणों की मदद से मौसम का आकलन किया जाता है। इनमें से कई उपकरण तो खराब भी हो चुके हैं। वहीं हवाओं के दिशासूचक यंत्र के आसपास पेड़ हो जाने से इसका भी आकलन सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। ऊपर से जिस जगह पर यह केंद्र स्थापित है, वो रेलवे की जमीन है। नया केंद्र बनाने के लिए राज्य सरकार से जमीन भी मांगी गई, लेकिन अब तक जमीन नहीं मिल पाने के कारण नया कार्यालय भी नहीं बनाया जा सका।

अब 100 साल पुराने भवन में यह कार्यालय जर्जर हालात में चल रहा है। जिला प्रशासन और वन विभाग के बीच मौसम विभाग के नए भवन के लिए मामला फाइलों में उलझा हुआ है। कुछ साल पहले विभाग ने एकमात्र आधुनिक मशीन के रूप में बैरोमीटर दिया, जबकि बिलासपुर में मौसम विज्ञान केंद्र को अपग्रेड करके इस केंद्र को एकदम से ही दरकिनार कर दिया गया। पिछले सप्ताह मौसम विभाग के अधिकारी ने गौरेला एसडीएम पुष्पेंद्र शर्मा से मिलकर दूसरी जगह पर जमीन आवंटित करने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मुलाकात की है। इस पर एसडीएम ने जल्द ही जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर लिए जाने का आश्वासन दिया है।

मौसम विज्ञान केंद्र का जर्जर भवन।
पेंड्रा रोड मौसम विज्ञान केंद्र का भवन बेहद जर्जर हालत में है। दशकों पुराने हो चुके इस भवन में कर्मचारी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं। बिल्डिंग की दीवारें कमजोर होकर उखड़ने लगी हैं। जिससे कभी भी हादसे की आशंका भी बनी हुई है।

केंद्रीय कार्यालय नागपुर से नए भवन की सहमति मिल चुकी है, सिर्फ नई जगह पर जमीन आवंटन की प्रक्रिया अटकी हुई है। करीब 2 साल पहले ही नए भवन की भूमि के लिए कलेक्टर के पास भी आवेदन किया गया था, लेकिन अभी भी SDM ने जल्द जमीन आवंटन का आश्वासन ही दिया है। जमीन को आवंटित होने में और कितना समय लगेगा, इसका कुछ पता नहीं है। प्रदेश के 7 प्रमुख मौसम विज्ञान केंद्रों में से एक पेंड्रारोड में तापमान मापन, प्रेशर दाब, आर्द्रता, हवा की दिशा, गति, बारिश संबंधित सभी आंकड़े और पूर्वानुमानों की जानकारी केंद्रीय कार्यालय भेजी जाती है। पहले बलून पायलेट जैसे महत्वपूर्ण टेस्ट भी इसी केंद्र से किए जाते रहे हैं।
