गीले-सूखे में कटे थे नंबर, दुरुस्त कर इसे बढ़ा सकते हैं अंक, लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं की निगम ने | Numbers were cut in wet and dry, can increase the marks by correcting it, but the corporation has not taken any initiative so far

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रायपुर7 घंटे पहले

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स्वच्छता सर्वे का काउंट-डाउन अब शुरू होने वाला है। अगले महीने के दूसरे सप्ताह दिल्ली से स्वच्छता सर्वे की टीम कभी भी राजधानी पहुंच सकती है। - Dainik Bhaskar

स्वच्छता सर्वे का काउंट-डाउन अब शुरू होने वाला है। अगले महीने के दूसरे सप्ताह दिल्ली से स्वच्छता सर्वे की टीम कभी भी राजधानी पहुंच सकती है।

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स्वच्छता सर्वे का काउंट-डाउन अब शुरू होने वाला है। अगले महीने के दूसरे सप्ताह दिल्ली से स्वच्छता सर्वे की टीम कभी भी राजधानी पहुंच सकती है। टीम शहर के बाजार, स्कूल-कालेज, मोहल्लों, बस्तियों, कालोनियों, अपार्टमेंट, व्यावसायिक इलाकों में सफाई का मुआयना करेगी। साफ-सफाई के सिस्टम और व्यवस्था का प्रत्यक्ष मुआयना करने के बाद टीम लोगों से फीडबैक भी लेगी।

रायपुर निगम ने सर्वे के लगभग सभी पैरामीटर्स पूरे कर लिए हैं। वाटर प्लस और गीले-सूखे कचरे को अलग-अलग इकट्ठा करने में निगम अब तक चूकता रहा है। पिछली बार छठवें से गिरकर 11वीं रैंकिंग पर पहुंचने की एक बड़ी वजह स्वच्छता के यही दोनों क्षेत्र रहे हैं। खारुन नदी में 200 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) के तीनों सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार हो गए हैं। फिलहाल 75 से 90 एमएलडी पानी साफ हो रहा है। रायपुर को वाटर प्लस दिलाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

गार्बेज फ्री सिटी और गीले-सूखे कचरे को लेकर कटता रहा है शहर का नंबर

गार्बेज फ्री सिटी और गीले-सूखे कचरे को लेकर रायपुर निगम के नंबर अब तक कटते रहे हैं। रायपुर निगम में 2011 से सालिड वेस्ट मैनेजमेंट लागू है। इसके तहत गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग इकट्‌ठा किया जाना जरूरी है। स्वच्छता सर्वे में अंक भी इसी आधार पर मिलते हैं। शहर में इकट्‌ठा होने वाला कचरा कितना प्रतिशत सोर्स (घरों से) से ही अलग-अलग मिलता है। रायपुर में रोज लगभग 550 टन कचरा निकलता है। मापदंड के अनुसार 60 गीला और 40 प्रतिशत सूखा कचरा होना चाहिए।

इसी अनुपात में गीला व सूखा कचरा अलग-अलग मिलना चाहिए। निगम ने दिल्ली की कंपनी एमएसडब्ल्यू साल्यूशन (रामकी) को घरों से कचरा इकट्‌ठा करने, उसे परिवहन करने और डिस्पोज करने का ठेका दिया है। कंपनी को हर साल निगम 35 करोड़ रुपए से ज्यादा भुगतान कर रहा है। कंपनी की गाड़ियां पूरे शहर से कचरा तो उठा रही हैं, लेकिन घरों से अलग-अलग नहीं ले पा रही है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि कचरा गाड़ियों में कचरे को अलग-अलग लेने की व्यवस्था ठीक नहीं है। कंपार्टमेंट बने हैं, लेकिन गाड़ियों में ड्राइवर के अलावा हेल्पर नहीं होने के कारण लोग एक साथ कचरा डाल देते हैं। जागरुकता अभियान भी ठीक से नहीं चल रहा है।

फीडबैक के लिए भी कोई पहल नहीं की
सर्वे में लोगों का फीडबैक महत्वपूर्ण है। फीडबैक के दो तरीके हैं। केंद्रीय मंत्रालय ने एक आनलाइन पोर्टर में फीडबैक के लिए लिंक जारी किया है। लोगों को इसमें जाकर खुद ही पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए अपना फीडबैक देना है। इसमें ज्यादा से ज्यादा लोगों की हिस्सेदारी ही रायपुर को अच्छे अंक दिला सकती है। इसे लेकर भी निगम ने कोई पहल नहीं की।

“स्वच्छता सर्वे को लेकर निगम अपने स्तर पर तैयारियां कर रहा है। गीले-सूखे को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वार्ड के पार्षदों और जनप्रतिनिधियों को भी इसमें आगे आने की अपील की गई है। खारुन एसटीपी तैयार है। महाराजबंद सहित तीन तालाबों में एसटीपी बना रहे हैं। इससे वाटर प्लस में रेटिंग बढ़ेगी।”
-एजाज ढेबर, महापौर रायपुर

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