Supreme Court की सख्त टिप्पणी: “यदि RERA बिल्डरों को ही फायदा पहुँचा रहा है तो बंद कर दें”

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दिल्ली। रियल एस्टेट क्षेत्र को नियंत्रित करने और घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए गठित Real Estate Regulatory Authority (RERA) के कामकाज पर सुप्रीम कोर्ट ने 12 और 13 फरवरी को सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणियाँ कीं। अदालत ने कहा कि यदि यह संस्था केवल बिल्डरों को लाभ पहुँचा रही है और खरीदारों को राहत नहीं दे पा रही, तो इसे बंद कर देना ही बेहतर होगा।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi की पीठ ने RERA में सेवानिवृत्त नौकरशाहों की नियुक्ति पर भी सवाल खड़े किए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि आर्किटेक्ट, शहरी योजनाकार या पर्यावरण विशेषज्ञों की जगह केवल रिटायर्ड अधिकारियों की नियुक्ति से शहरी विकास और खरीदारों की समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।

पीठ ने कहा कि जिन लोगों के हितों की रक्षा के लिए RERA का गठन किया गया था, वे आज “हताश, निराश और दुखी” नजर आ रहे हैं। अदालत के अनुसार, कई मामलों में घर खरीदारों को प्रभावी राहत नहीं मिल पा रही है।

राज्यों को पुनर्विचार के निर्देश

हालांकि सुप्रीम कोर्ट जिस मामले की सुनवाई कर रहा है, वह छत्तीसगढ़ से संबंधित नहीं है, फिर भी अदालत ने सभी राज्य सरकारों को RERA के गठन और इसके वर्तमान स्वरूप पर पुनर्विचार (revisit and rethink) करने के निर्देश दिए हैं।

यह टिप्पणी हिमाचल प्रदेश सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जो RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के विवाद से जुड़ी थी। कोर्ट ने दफ्तर शिफ्ट करने की अनुमति तो दे दी, लेकिन नियामक संस्था के कामकाज पर गंभीर चिंता भी जताई।

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उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में भी RERA का कार्यालय रायपुर में स्थित है और यहाँ भी सेवानिवृत्त नौकरशाह को चेयरमैन बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद राज्यों में RERA की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छिड़ने की संभावना है।

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