छत्तीसगढ़ में 3 सालों में 38 हाथियों और 9 बाघों की मौत, विधानसभा में गूंजा मुद्दा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में बजट सत्र के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। प्रदेश में पिछले तीन वर्षों के भीतर बाघों और हाथियों की मौत के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वन मंत्री केदार कश्यप ने सदन में बताया कि बीते 3 सालों में राज्य ने 38 हाथी और 9 बाघ खो दिए हैं।

विधानसभा में पेश आंकड़े

कांग्रेस विधायक शेषराज हरवंश द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में वन मंत्री ने बताया कि न केवल बड़े जानवर, बल्कि पिछले तीन वर्षों में कुल 562 वन्यजीवों की अस्वाभाविक मृत्यु हुई है। यह आंकड़ा राज्य में वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

हाथियों की मौत का विवरण

मंत्री केदार कश्यप के अनुसार, हाथियों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

 

वर्ष 2023 में बलरामपुर और धरमजयगढ़ में 1-1 हाथी की मौत हुई। वर्ष 2024 में कुल 18 हाथियों की मौत हुई। इनमें सबसे ज्यादा रायगढ़ (4), सूरजपुर (3) और धरमजयगढ़ (3) में मामले दर्ज किए गए।

वर्ष 2025 में 16 हाथियों की जान गई, जिसमें रायगढ़ वन मंडल (7) और धरमजयगढ़ (4) सबसे ज्यादा प्रभावित रहे।

वर्ष 2026 में (अब तक) 2 हाथियों की मौत हो चुकी है (उदंती सीतानदी और रायगढ़)।

छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय पशु ‘बाघ’ भी सुरक्षित नहीं हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में सारंगढ़-बिलाईगढ़ और कोरिया में 1-1 बाघ की मौत हुई। वर्ष 2025 बाघों के लिए सबसे घातक रहा, इस साल कुल 6 बाघों की मौत हुई। इसमें अचानकमार टाइगर रिजर्व, नंदनवन सफारी और सूरजपुर जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

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वर्ष 2026 में अब तक अचानकमार टाइगर रिजर्व में 1 बाघ की मौत दर्ज की गई है।

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