अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों को मिलेगा काम, पंचायतों की रूचि नहीं लेने पर स्व-सहायता समूह को मिलेगा मौका | Panchayats will get work in scheduled areas, if panchayats do not take interest, self-help groups will get a chance

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बिलासपुर2 घंटे पहले

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आदिवासी बाहुल्य इलाकों को घोषित किया गया है अनुसूचित क्षेत्र। - Dainik Bhaskar

आदिवासी बाहुल्य इलाकों को घोषित किया गया है अनुसूचित क्षेत्र।

राज्य सरकार ने रेत खदानों के संचालन का अधिकार अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों को देने का फैसला लिया है। शासन के इस निर्णय के बाद जिला प्रशासन ने रेत खदानों का काम अनुसूचित इलाकों में ग्राम पंचायतों को देने की तैयारी शुरू कर दी है। बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के ग्राम पंचायतों को रेत खदान संचालित करने का अधिकार मिलेगा। अगर, कोई पंचायत रेत खदान संचालित करने में रूचि नहीं लेगी तो महिला स्व-सहायता समूह या फिर बेरोजगारों को यह काम दिया जाएगा।

शासन की ओर से बीते 19 जनवरी को अधिसूचना जारी कर अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली रेत खदानों के संचालन का अधिकार पंचायतों को दिया गया है। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायतों की ओर से रेत खदान संचालन का नक्शा, खसरा सहित आवेदन प्रारूप में एक हजार रुपए के आवेदन शुल्क (गैर वापसी योग्य), के साथ कलेक्ट्रेट के खनिज शाखा में जमा करना होगा।

शर्तों को पूरा करने पर पांच साल तक मिलेगा रेत खदान
आवेदन प्राप्त होने पर जिला स्तरीय समिति रेत खनन क्षेत्र का चिन्हांकन कर निरीक्षण प्रतिवेदन लेंगे। इसके बाद कलेक्टर की ओर से घोषित किया जाएगा और उसे स्पेशल नाम दिया जाएगा। खदान घोषित किए जाने के 15 दिन के भीतर संबंधित पंचायतों को 25 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर या उसके किसी भाग के लिए कार्यपालन प्रतिभूति राशि चालान के माध्यम से जमा करना होगा। इसके बाद कलेक्टर की ओर से पत्र जारी किया जाएगा। संबंधित पंचायत को एक साल के भीतर अनुमोदित उत्खन्न योजना एवं पर्यावरण स्वीकृति सहित अन्य आवश्यक सहमति और अनुमतियां प्राप्त करना होगा। सभी शर्तों को पूरा करने के बाद ऐसे पंचायतों को पांच साल के लिए रेत खदान के लिए पट्टा दिया जाएगा। पट्टा मिलने के बाद 90 दिन के भीतर अनुबंध भी करना होगा।

पंचायतों के रूचि नहीं लेने पर महिला स्व सहायता समूह या बेरोजगारों को मिलेगा काम
अगर कोई ग्राम पंचायत रेत खदानों का संचालित करने के लिए रूचि नहीं लेती है तो उसी पंचायत के संबंधित जगह के पंजीकृत स्व-सहायता समूह या फिर स्थानीय बेरोजगार की कोआपरेटिव सोसायटी की ओर से रेत खदान संचालित करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जा सकेगा। इसके लिए ग्राम सभा का अनुमोदन भी आवश्यक होगा। इस प्रकार आवेदन प्राप्त होने पर जिला कलेक्टर, जिला कार्यालय, जिला स्तरीय समिति के माध्यम से आवेदन पर विचार करने के बाद उन्हें खदान संचालन के लिए अधिकृत किया जा सकेगा। बिना विधिमान्य प्राधिकार के रेत खदानों से या अन्य क्षेत्रों से अवैध उत्खनन, परिवहन, भण्डारण करने पर खान एवं खनिज अधिनियम के प्रावधानों के तहत की जाएगी।

जिले में कोटा ब्लॉक है अनुसूचित क्षेत्र
वैसे तो अविभाजित बिलासपुर जिले में मरवाही, गौरेला-1, गौरेला-2 आदिवासी विकासखंड और कोटा राजस्व निरीक्षक खंड है। लेकिन, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही नया जिला बनने के बाद अब बिलासपुर जिले में एक मात्र कोटा ब्लॉक अनुसूचित क्षेत्र में आता है। ऐसे में कोटा ब्लॉक की पंचायतों को रेत खदान संचालित करने का काम मिल सकेगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने आवेदन जमा करने की तैयारी भी शुरू कर दिया है।

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