ब्रम्हानंद को प्रत्याशी बनाने पर BJP प्रभारियों को पड़ा दिल्ली से डंडा, कांग्रेस से आदिवासी नहीं थे नाराज, परिणाम- हम जीत गए | BJP in-charge got a stick from Delhi for making Bramhanand a candidate, tribals were not angry with Congress, result – we won

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कांकेर20 मिनट पहले

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आबकारी मंत्री कवासी लखमा। - Dainik Bhaskar

आबकारी मंत्री कवासी लखमा।

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छत्तीसगढ़ में भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने भाजपा पर तंज कसा है। उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में कहा कि ब्रह्मानंद को प्रत्याशी बनाने पर छत्तीसगढ़ में उपचुनाव के जो BJP प्रभारी थे, उन्हें दिल्ली से ठंडा पड़ा है। ऐसे प्रत्याशी को मैदान में क्यों उतारा? कांग्रेस से आदिवासी नाराज नहीं थे। परिणाम यह हुआ कि हम यह उपचुनाव जीत गए।

पढ़िए कवासी लखमा के साथ दैनिक भास्कर की खास बातचीत….

सवाल – कांग्रेस के लिए उपचुनाव की यह ऐतिहासिक जीत रही। आप इस चुनाव को आप किस नजरिए से देख रहे हैं?

जवाब- चुनाव को चुनाव के नजरिए से देख रहे हैं। मतदाता भगवान होते हैं। मैं भी एक छोटा सा कार्यकर्ता हूं। हम कार्यकर्ता कांग्रेस पार्टी के निर्देश का पालन करते हैं। झंडी बांधों, जिंदाबाद के नारे लगाओ। भूपेश बघेल जो निर्देश देते हैं मैं उनके निर्देशों का पालन करता हूं। पिछले 4 सालों में भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में जो काम किए हैं यह उसी का परिणाम है कि हम चुनाव जीते हैं।

सवाल- इस उपचुनाव में क्या कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती आरक्षण का मुद्दा था? क्योंकि इसी मुद्दे के साथ BJP भी जनता के बीच जा रही थी और चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ खड़ी थी।

जवाब- मैं शुरू से कहता आ रहा था कि हमसे आदिवासी नाराज नहीं थे। आदिवासियों को जबरन आगे लाकर खड़ा किया जा रहा था। आदिवासियों को कांग्रेस के साथ लड़ाया जा रहा था। बस्तर की जनता नेहरू-गांधी पार्टी के साथ है। कांग्रेस पार्टी के साथ है। भाजपा और RSS आदिवासियों को कांग्रेस के साथ भिड़ा रहे थे। लेकिन, अब दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।

कवासी लखमा से बातचीत।

कवासी लखमा से बातचीत।

सवाल- भाजपा प्रत्याशी ब्रम्हानंद नेताम पर रेप के आरोप लगे हैं। उन्हें गिरफ्तार करने झारखंड की पुलिस भी आई थी। आप को क्या लग रहा है, इन्हीं मामलों को लेकर क्षेत्र की जनता उनसे नाखुश थी?

जवाब- इस बात को बोलना मैं पसंद नहीं करता हूं। लेकिन, इतना है ऐसे प्रत्याशी को चुनाव में खड़े करने पर यहां के भाजपा प्रभारियों को दिल्ली से बहुत डंडा पड़ा है। ऐसे प्रत्याशी को खड़े नहीं करना चाहिए। आदिवासी कभी भीख नहीं मांगता, डकैती नहीं करता। आदिवासी इमानदार होता है।

सवाल- आपने बृजमोहन अग्रवाल को एक चैलेंज किया था कि यदि भाजपा जीतती है तो आप यहां कदम नहीं रखेंगे और हारती है तो वे कदम नहीं रखेंगे।

जवाब- बृजमोहन अग्रवाल खुद को छत्तीसगढ़ का एक ताकतवर नेता समझते हैं। सिर्फ पैसे के दम पर और अपने पावर के दम पर। मैं तो तेंदूपत्ता तोड़ने वाला हूं, गरीब हूं। गरीब भी उतना ही खाना खाता है और सेठ भी उतना ही खाना खाता है। गरीब को सताओंगे तो विधानसभा मत आना मैं यह चुनौती दिया था और मैं इसी पर कायम हूं।

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