केरल और ओडिशा के बाद पहली बार छ्त्तीसगढ़ में देखा गया, चीन और अन्य एशियाई देशों में पाई जाती है प्रजाति | Spotted in Chhattisgarh for the first time after Kerala and Odisha, species found in China and other Asian countries

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जगदलपुर2 घंटे पहले

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विशेष प्रजाति का चमगादड़ मिला है। - Dainik Bhaskar

विशेष प्रजाति का चमगादड़ मिला है।

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छत्तीसगढ़ के बस्तर में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में चमगादड़ की एक विशेष प्रजाति मिली है। जिसका वजन सिर्फ करीब 5 ग्राम और रंग ऑरेंज और ब्लैक है। जिसे बोलचाल की भाषा में पेटेंड बैट कहा जाता है। बताया जा रहा है कि, चीन, भारत समेत अन्य एशियाई देशों में यह प्रजाति पाई जाती है। इससे पहले भारत के केरल और ओडिशा में यह प्रजाति मिली थी। लेकिन, छ्त्तीसगढ़ के बस्तर में इसे पहली बार देखा गया है।

पक्षियों पर शोध कर रहे रवि नायडू ने बताया कि, इस प्रजाति को अब तक कोई खास नाम न देकर इसे पेटेंड बैट के नाम से ही जाना जाता है। वहीं इसका वैज्ञानिक नाम ‘केरीवोला पिक्टा’ है। इस प्रजाति के चमगादड़ ज्यादातर सूखे इलाकों या ट्री हाउस में पाए जाते हैं। इनका वजन मात्र 5 ग्राम होता है। 38 दांत वाले इस चमगादड़ का मुख्य आहार सिर्फ कीड़े-मकोड़े ही होते हैं। चमगादड़ की यह प्रजाति भारत और चीन समेत कुछ एशियाई राज्य में पाई जाती है।

उन्होंने बताया कि, भारत में सबसे पहले इसे साल 2019 में केरल में देखा गया था। फिर साल 2020 में इसे ओडिशा में देखा गया। वहीं अब पहली बार CG के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में यह प्रजाति मिली है। उन्होंने बताया कि, चमगादड़ की दूसरी प्रजातियों की तुलना में यह प्रजाति बेहद खूबसूरत और आकर्षित करने वाली है। बस्तर के समाजसेवी शकील रिजवी ने बताया कि, इस पार्क में बेहद खूबसूरत और दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीव पाए जाते हैं। यहां पक्षियों की करीब 200 प्रजातियां हैं।

ऐसे मिला

बताया जा रहा है कि, कुछ फॉरेस्ट कर्मी नेशनल पार्क की तरह गए हुए थे। उन्हें यह चमगादड़ पेड़ के नीचे गिरा हुआ मिला था। जिसे पकड़कर उन्होंने कुछ तस्वीरें ली। फिर वापस जंगल में ही सुरक्षित जगह छोड़ दिया। नेशनल पार्क के DFO गणवीर धम्मशील ने बताया कि, पक्षियों पर शोध कर रहे लोगों से पता लगाया जा रहा है कि, इस प्रजाति के चमगादड़ किस तरह के वातावरण में रहते हैं। उनके संरक्षण के प्रयास किए जाएंगे।

बैलाडीला में मिली थी उड़ने वाली गिलहरी

दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला की पहाड़ी में कड़मपाल इलाके में एक विलुप्त प्रजाति की उड़ने वाली गिलहरी मिली थी। गिलहरी घायल अवस्था में पेड़ के नीचे पड़ी थी। जंगल गए ग्रामीणों ने गिलहरी को देखा, फिर इसकी जानकारी पर्यावरण प्रेमी और सर्प मित्र की टीम को दी गई। जिन्होंने गिलहरी का रेस्क्यू कर इलाज किया। जिसके बाद वापस जंगल में ही इसे सुरक्षित छोड़ दिया है। टीम के सदस्यों ने बताया कि, इस तरह की प्रजाति देश में सिर्फ 12 ही है। लेकिन, सभी विलुप्त है।

सर्प मित्र टीम के सदस्य अमित मिश्रा ने बताया कि, भारत में उड़ने वाली गिलहरियों की 10 प्रजातियां पाई जाती हैं। लेकिन, हाल ही में वैज्ञानिकों ने दो और नई प्रजातियों के मिलने का दावा किया है। जिसके साथ अब ये संख्या 12 हो गई है। ये जीव अपने आप में काफी अनोखें होते हैं। यह सिर्फ घने जंगलों में ही देखने को मिलते हैं। इनमें से एक विलुप्त प्रजाति indian giant flying squirrel (उड़नेवाली विशाल गिलहरी) बैलाडीला क्षेत्र में देखी गई है।

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