धान खरीदी: टोकन और लिमिट बड़ी समस्या हैं किसानों के लिए

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सरकारी दावे के अनुसार आसान नहीं है धान बेचना

भिलाई। धान खरीदी में इस बार किसानों की सुविधा के लिए शुरू की गई तुंहर टोकन व्यवस्था उनके लिए परेशानी बन गई है। इसी तरह लिमिट में कटौती से भी किसान हलाकान हो रहे हैं। इन दोनों ही समस्याओं को देखते हुए खरीदी में तेजी नहीं आ रही है और किसान तनाव में हैं।

दुर्ग न्यूज के प्रतिनिधि ने धान खरीदी केन्द्रों का दौरा किया। सेलूद सोसायटी में अचानकपुर के किसान द्वारिका साहू ने बताया कि पहले तो बड़े मुश्किल से टोकन हासिल हुआ। उसमें भी पूरा धान नहीं बेच पाया। उन्हें कुल 70 क्विंटल धान बेचना है लेकिन लिमिट के चलते 60 क्विंटल बेच पाए। बाकी 10 क्विंटल बेचने फिर चक्कर लगाने मजबूर हैं। इसी तरह फेकारी के किसान पवन कुमार साहू ने बताया कि 20 दिन से टोकन के लिए घूम रहा है। वहीं अचानकपुर के पंचूराम ने बताया कि एक माह बाद आफलाइन टोकन प्राप्त कर सका है। टोकन की नई व्यवस्था के तहत किसान को 70 फीसदी धान आनलाइन टोकन से ही बेचना है। किसानों का कहना है कि एप में जाने पर दो-तीन मिनट के भीतर टोकन समाप्त हो जाते हैं फिर अगले दिन का इंतजार करना होता है। गांव के किसान अभी तक न‌ई व्यवस्था को समझ भी नहीं पा रहे हैं। वहीं 30 फीसदी आफलाइन धान बेचने के लिए भी खरीदी केन्द्रों में लाइन लग रही है। पाटन ब्लाक में कुल 33 सोसायटी हैं और हर जगह यही हालात हैं।

सेलूद से बुधवार तक परिवहन शुरू नहीं हो पाया था। जबकि उत‌ई फड़ से उठाव शुरू हो गया है। बता दें कि कस्टम मिलिंग के लिए व्यापारी भी अच्छी क्वालिटी और नजदीकी सेंटर से धान का उठाव पहले करते हैं। सेलूद में धान का परिवहन शुरू नहीं हुआ तो परेशानी बढ़ने की आशंका है।

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उत‌ई सोसायटी में पिछले साल 38900 क्विंटल धान खरीदी हुई थी। उसके मुकाबले इस गति काफी धीमी है। पिछले साल प्रतिदिन 1273 क्विंटल की लिमिट थी जो इस बार 622 क्विंटल कर दी गई है। इन्हीं सब समस्याओं को देखते हुए किसान सशंकित है कि उसका धान बिकेगा कि नहीं ? हालांकि अभी 31 जनवरी तक धान खरीदा जाएगा। बता दें कि पिछले साल छत्तीसगढ़ में रिकार्ड धान खरीदी हुई थी।

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