छत्तीसगढ़ की धरती को बंजर होने से बचाना है तो प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाना ही होगा: सांसद बृजमोहन अग्रवाल

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*रायपुर /भाटापारा।

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धरती की उर्वरकता और स्वस्थ पीढ़ी के लिए जैविक खेती को अपनाना हमारी जिम्मेदारी है यह कहना है रायपुर लोकसभा सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल का, जिन्होंने गुरुवार को भाटापारा में आयोजित ‘राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – तिलहन (NMEO-OS)’ अंतर्गत जिला स्तरीय तिलहन मेला सह जैविक कृषि कार्यशाला में शामिल होकर हुए किसानों को पारंपरिक और वैज्ञानिक खेती के समावेश का मूल मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि केवल धान की फसल पर निर्भरता न केवल हमारी भूमि की उर्वरक शक्ति को कम कर रही है, बल्कि भविष्य के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर रही है।

धरती की उर्वरकता और स्वस्थ पीढ़ी के लिए जैविक खेती अनिवार्य

सांसद श्री अग्रवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि, आज जब से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी और ₹3100 प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य दिया जा रहा है, तब से एक स्थिति यह भी बन गई है कि अधिकांश किसान केवल धान की खेती तक सीमित होकर रह गए हैं। हर तरफ केवल धान की ही खेती हो रही है। बाकी फसलों का उत्पादन लगभग बंद होता जा रहा है।

हमें विचार करना होगा कि क्या केवल धान की खेती से भविष्य में काम चल पाएगा? एक समय ऐसा भी आ सकता है जब हमारी जमीन का पानी सूख जाएगा। धान ऐसी फसल है जिसमें सबसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है। छत्तीसगढ़ में आज पानी की कमी नहीं है, लेकिन पहले हमारे गांवों में पांच-दस तालाब हुआ करते थे। आज वे तालाब सूख रहे हैं, समाप्त होते जा रहे हैं।

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बार-बार एक ही फसल लेने से धरती की उर्वरक शक्ति भी कम होती है। अधिक उत्पादन लेने के लिए हम लगातार यूरिया और फास्फेट का उपयोग कर रहे हैं। इससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। आने वाली पीढ़ियों, हमारे बच्चों और नाती-पोतों के लिए जो जमीन हम छोड़कर जाएंगे, वह कहीं बंजर न हो जाए, इस बारे में हमें गंभीरता से सोचना होगा।

इसीलिए कहा जाता है कि फसल चक्र अपनाना चाहिए। अलग-अलग फसलें लेने से मिट्टी की उर्वरक शक्ति बनी रहती है। पहले लोग अपने घर के खाने के लिए अलग से धान रखते थे, लेकिन आज यह परंपरा भी लगभग समाप्त हो गई है। हम केवल अधिक उत्पादन और अधिक कमाई के पीछे भाग रहे हैं।

लेकिन सोचने की बात यह भी है कि जितना अधिक पैसा हम कमाते हैं, उसका बड़ा हिस्सा बाद में डॉक्टरों को देना पड़ता है। कम से कम हमें यह तो तय करना चाहिए कि हमारे परिवार के खाने के लिए जितना चावल और धान चाहिए, उतना उत्पादन हम जैविक तरीके से करें। गोबर खाद और गौमूत्र का उपयोग कर प्राकृतिक खेती करें।

हमें यह विचार करना होगा कि अपनी आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ रखना है, अपने परिवार को स्वस्थ रखना है, अपने बच्चों और नाती-पोतों को स्वस्थ रखना है, तो हमें प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर लौटना ही होगा।

उन्होंने कहा कि, आज हमें यह भी सोचना होगा कि हमने पशुपालन को लगभग छोड़ ही दिया है। पहले के समय में जिसके घर में जितने अधिक पशु होते थे, उसे उतना ही समृद्ध और बड़ा आदमी माना जाता था। आज अधिकांश घरों में पशु नहीं हैं। बच्चों के लिए शुद्ध दूध तक उपलब्ध नहीं है। बाजार से जो दूध आता है, वह किस प्रकार तैयार होता है, इसकी भी चिंता लोगों को रहती है।

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इतिहास स्वयं को दोहराता है। इसलिए समय की मांग है कि हम फिर से प्राकृतिक खेती और जैविक खेती की ओर लौटें। यदि हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करना है तो हमें गोबर खाद और गौमूत्र आधारित खेती को अपनाना होगा। प्राकृतिक खेती और जैविक खेती ही स्वस्थ समाज, स्वस्थ परिवार और स्वस्थ भविष्य का आधार बन सकती है।

खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने आह्वान

सांसद ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन को साझा करते हुए कहा कि यदि खेती को लाभ का व्यवसाय बनाना है, तो किसानों को विविधीकरण अपनाना होगा। उन्होंने सलाह दी कि किसान अपनी जमीन के एक चौथाई हिस्से में फल-फूल, एक चौथाई में पशुपालन, मछली पालन या मुर्गी पालन करें, ताकि आय का जरिया साल भर बना रहे। उन्होंने बताया कि सरकार दलहन-तिलहन की खेती करने पर 15,000 रुपये प्रति वर्ष और खेत में वृक्षारोपण करने पर 10,000 रुपये प्रति वर्ष प्रोत्साहन राशि दे रही है।

युवाओं को गांव में ही रोजगार और खेती से जोड़ने के लिए उन्होंने ‘नेट हाउस’, ‘पॉली हाउस’ और ‘ड्रिप इरिगेशन’ जैसी आधुनिक तकनीकों पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि रायपुर जैसे शहरों में जैविक उत्पादों की भारी मांग है और जैविक उत्पाद सामान्य फसलों की तुलना में कई गुना अधिक कीमत पर बिक रहे हैं। अतः जैविक खेती ‘नुकसान नहीं, बल्कि फायदे का सौदा’ है।

इस अवसर पर कृषि मंत्री राम विचार नेताम, मंत्री टंक राम वर्मा, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा, किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह ठाकुर, अश्विनी शर्मा, सनम जांगड़े सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित थे।

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