मितानिन और आंगनबाड़ी की बहनें मानवता सेवा की मिसाल: भूपेश बघेल, हर वर्ष आंगनबाड़ी कार्यकर्ता- सहायिका होंगी सम्मानित

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14 नवंबर को किया जाएगा सम्मान 

 

महिला समूहों को दिया जाने वाला ऋण 4 से बढ़ाकर किया 6 लाख रुपए 

 

रायपुर, 3 म‌ई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एवं मितानिन वास्तव में मानवता की सेवा करती हैं। आपने छत्तीसगढ़ में जो कार्य किया है वह अतुलनीय है। यह मानवता की सेवा की मिसाल है। आप लोग जो कार्य करते हैं, कोई अन्य नहीं कर सकता। यह बात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजधानी के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित आभार सम्मेलन में कही।

मुख्यमंत्री जैसे ही इस कार्यक्रम में पहुंचे प्रदेश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में आई आंगनबाड़ी सहायिका, मितानिनों ने ताली बजाकर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और खुशी जाहिर की। आभार सम्मेलन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने मुख्यमंत्री को गज माला पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया और मानदेय बढ़ाने के निर्णय को लेकर अपनी खुशियां जाहिर की। इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य के लिए 6 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 5 मितानिनों को सम्मानित किया गया। साथ ही महिला कोष से 6 स्व-सहायता समूहों को 10 लाख रूपए के ऋण राशि का चेक सौंपा गया।

 

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और मितानिनों की ओर से प्रतिनिधियों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने मानदेय और प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर हमें सम्मानजनक जीवन जीने लायक बनाया है। उन्होंने हमारी दाल-रोटी और परिवारों की चिंता की है। हम विश्वास दिलाते हैं कि कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने में पूरा सहयोग करेंगे।

मुख्यमंत्री बघेल ने आभार सम्मेलन में बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि सक्षम योजना अंतर्गत योजना के लाभ के लिए महिलाओं की वार्षिक आय की सीमा 1 लाख रूपए से बढ़ाकर 2 लाख रूपए किया जाएगा। महिला समूहों को दिए जाने वाली ऋण राशि की सीमा 4 लाख से बढ़ाकर 6 लाख किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने 5000 आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि 14 नवंबर को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका को सम्मानित किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज यह अद्भुत कार्यक्रम है, जहां पहली बार ऐसा हुआ है कि मातृ शक्ति बड़ी संख्या में ही नहीं बल्कि बहुसंख्या में उपस्थित हैं। आज आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, मितानिनों द्वारा आभार प्रकट करने आए हैं, बल्कि मैं प्रदेश की पौने तीन करोड़ जनता से उनका आभार व्यक्त करता हूं। कोरोना काल में आप लोगों ने जिन परिस्थितियों का सामना करते हुए कार्य किया और दायित्वों को पूरा किया, वह अन्य कोई नहीं कर सकता। जब दूसरी लहर में कोरोना नियंत्रण में नहीं आ रहा था, तब हमने छत्तीसगढ़ के सभी अस्पतालों, आसपास के गांव, विकासखण्डों के स्वास्थ्य केन्द्रों में बेड लगाकर इलाज कराना शुरू किया, तब भी नियंत्रण नहीं हुआ। तब हमने सभी मितानिनों को कोरोना किट दिया और घर-घर बंटवाना शुरू किया।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब लॉकडाउन की स्थिति थी, तब हमारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका बहनें कुपोषण के खिलाफ जंग जारी रखी थी।

राज्य में कुपोषण की दर 37.7 प्रतिशत थी, वह अब 31.3 प्रतिशत रह गई है। हमारी मितानिन बहनों द्वारा घर-घर जाकर मलेरिया की जांच की जा रही है और दवाईयां दी जा रही है। इन्हीं प्रयासों के फलस्वरूप मलेरिया के प्रकरणों में कमी आई है। छत्तीसग छत्तीसगढ़ में धान कोदो कुटकी की कीमत जितना प्रदेश में मिलता है उतना देश के किसी प्रदेश में नहीं मिलता। शासकीय कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम शुरू किया ताकि बुढ़ापे में वे किसी पर आश्रित न रहें। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका, मितानिन सभी का मानदेय बढ़ाया गया है।

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स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव तथा

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिया ने भी महिलाओं को संबोधित किया।

कार्यक्रम में संसदीय सचिव श्रीमती रश्मि आशीष सिंह, संसदीय सचिव गुरूदयाल सिंह बंजारे, विधायक सत्यनारायण शर्मा, धनेन्द्र साहू, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती तेजकुंवर नेताम, रायपुर नगर निगम सभापति प्रमोद दुबे, वरिष्ठ अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं, मितानिन उपस्थित थीं।

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