आत्मिक स्मृति और जगत नियंता परमात्मा की याद में कर्म कर जीवन सरल बनाएं: आत्म प्रकाश

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भिलाई। पत्ते-पत्ते का पता है परमात्मा को, इस मनुष्य रूपी कल्पवृक्ष का, भगवान को सर्वज्ञ जानीजाननहार कहते हैं, वह इस मनुष्य रूपी कल्पवृक्ष के बीज रूप हैं। इस सृष्टि पर हम सभी आत्माएं अशरीरी (विदेही )आए थे, अशरीरी बनकर ही जाना है।

उक्त बातें प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा सेक्टर 7 स्थित पीस ऑडिटोरियम में संस्था के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू से मीडिया विंग के उपाध्यक्ष तथा ज्ञान अमृत मासिक पत्रिका के संपादक राजयोगी ब्रह्माकुमार आत्म प्रकाश भाई ने भिलाई प्रवास पर कही।

आपने कर्मयोग के बारे में बताया कि हाथों से काम करें मन, बुद्धि से परमात्मा को याद करे, सब प्रभु अमानत समझ कर कर्म करने वाला ही कर्मयोगी और सहज राजयोगी है।

दो बातों का अटेंशन सदा रखो, कर्म करते स्वयं को ट्रस्टी समझ, आत्मिक स्थिति में स्थित रहकर कर्म करना है जगत नियंता परमात्मा करनकारवनहार की स्मृति से कर्म करो।

आत्म अभिमानी अर्थात जिन्हें अपने पद, धन, शिक्षा, रूप, गुणों, विशेषताओं का अभिमान न हो।

इस संसार में रहते हैं कमल फूल समान न्यारे रहो, संसार में व्याप्त बुराइयां का प्रभाव न पड़े।

मनसा वाचा कर्मणा को श्रेष्ठ बनाएं। हमारा मन शांत निर्मल हो, वाणी मधुर मीठी हो, कर्मणा हमारे कर्म सभी को सुख देने वाले हो।

सतयुग में एक राज्य एक धर्म एक भाषा थी जिसको रामराज्य और प्राचीन भारत, स्वर्णिम भारत स्वर्ग कहा जाता था। भारत को बहुत ही मान देते हैं, अभी परमात्मा द्वारा सृष्टि पर पुनः राम राज्य की स्थापना का कार्य चल रहा है।

 

जिनकी दिल बड़ी सच्ची साफ दिल है उनके लिए असंभव कार्य भी संभव हो जाता है, जो कार्य ब्रह्माकुमारी बहनें पूरे विश्व में कर रही हैं, यह प्रत्यक्ष उदाहरण ब्रह्माकुमारी संस्था का।

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इनकी एकता और परमात्मा में दृढ़ निश्चय और विश्वास से इनका हर कार्य सफल होता है।

उन्होंने कहा कि अपनी और दूसरों की विशेषताओं, गुणों को सामने रखो कमजोरी को नहीं, कमजोरी को ज्यादा नहीं सोचो खुशी में आगे बढ़ते जाओ।

इस अवसर पर राजयोग भवन में पुनःनिर्मित भोलेनाथ शिव बाबा की भंडारी का रिबन काट कर, दीप प्रज्वलध कर ब्रह्माकुमार आत्म प्रकाश भाई, इंदौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी, ब्रह्माकुमारी आशा दीदी एवं भिलाई के सभी सेवा केंद्रों की प्रमुख ब्रह्माकुमारी बहनों ने परमात्म याद में रहकर उद्घाटन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ब्रह्मा वत्स उपस्थित रहे।

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