
दुर्ग न्यूज़, 30 दिसंबर। गरियाबंद जिले के उदंती सीता नदी अभ्यारण में फिल्म ‘पुष्पा’ की तर्ज पर धड़ल्ले से बेशकीमती सागौन लकड़ी की तस्करी की जा रही है। गिरोह शातिर तरीके से लकड़ी काटकर नदी में बहाकर ओडिशा ले जाता है। लकड़ी तस्करी गैंग पर अभ्यारण्य प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

उदंती सीता नदी अभ्यारण्य के उपनिदेशक वरुण जैन बताया कि गोपनीय सूचना मिली कि वन परिक्षेत्र रिसगांव के चमेदा गांव से लगे सागौन प्लांटेशन से ओडीशा राज्य के 15 व्यक्तियों द्वारा सागौन वृक्षों की कटाई कर 15 नग सायकिल में 15 नग सागौन स्लीपर ले जाने वाले है। सूचना पर वन परिक्षेत्र रिसगांव के वन अमला द्वारा मौके पर घेराबंदी की गई। इस कार्रवाई में मात्र एक आरोपी पकड़ में आया और बाकी 14 आरोपी मौके से फरार हो गए। मौके पर 15 सायकिल और 15 नग लट्ठा को जब्त किया गया। फरार आरोपियों की पतासाजी करने एन्टीपोंचिग टीम उदंती सीतानदी टायगर रिजर्व गरियाबंद को शामिल किया गया है।

ओडिशा में बनाया नेटवर्क, टीम ने 5 लाख का जब्त किया इमारती
कण्डेतरा के फरार आरोपी कुमला पिता तिहारू राम, भुनेश्वर पिता रमेश गोड़ के घर की तलाशी ली गयी,आरोपी फरार थे। कृष्णा पिता बिसंबर हल्बा के घर तलाशी लेने पर बड़ी मात्रा में फर्नीचर बनाने के सामान, सागौन पलंग, पल्ला, कुर्सी जब्त किया गया। ग्राम राजपुर के फरार आरोपी मंगलु राम के घर से 15 नग गीला सागौन का लट्ठा जब्त किया गया। उसके बाद रंजीत पिता रतिराम गोड़ के घर बाड़ी का तलाशी में 4 नग सागौन लट्ठा एवं घर से 36 नग सागौन पल्ला, 6 नग साल की चौखट कड़ी जब्त किया गया। ओडिशा टीम के साथ संयुक्त टीम बनाकर ग्राम सोनपुर में संतोष विश्वास के घर से बनी फर्नीचर एवं पल्ला एवं लट्ठा कुल 20.995 cft जब्त किया गया। अन्य घरों से कुल 3 मेटाडोर सागौन की लकड़ी, सागौन लकड़ी से बना फर्नीचर, पल्ला, चिरान, लट्ठा, बरामद किया गया। ओडिशा और छत्तीसगढ़ वन विभाग सभी फरार आरोपियों की तलाश कर रही है।
इस कार्रवाई में उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व गरियाबंद के एवं नरंगपुर वनमण्डल के समस्त वन कर्मचारी/अधिकारी और पुलिस विभाग गरियाबंद का विशेष योगदान रहा
बरसाती नदी में बहाकर लकड़ी करते थे जंगल के बाहर
ओडिशा सीमा से लगे अभ्यारण के जंगलों से इमारती हरे भरे पेड़ो की कटाई कर उड़ीसा में सप्लाई कर रहा था। हथियार से लैस इस गिरोह में 15 मुख्य आरोपी के अलावा इनके कई सहयोगी भी हैं। बारिश के दिनो में पेड़ों को काटकर उदंती नदी में बहाकर ओडिशा से ले जाते थे,बरसात में ज्यादा कटाई होती थी, जिसमें जंगल में अतिक्रमणकारियों का भी सहयोग होता था। पिछले चार सालों से सक्रिय यह गैंग अब तक लाखों पेड़ों की कटाई कर चुका है।

