भिलाई में बहती है समरसता की बयार: सांसद बघेल

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० कीर्ति शेष श्री राम मोहनन स्मृति सम्मान रजनी रजक, पोलम्मा, विजयलक्ष्मी व डा मिट्ठू हुए सम्मानित

भिलाई। “भारत की सभी प्रांतीय संस्कृतियों का अद्भुत संगम है भिलाई, जहाँ समरसता की बयार बहती है। सभी परस्पर प्रेम और सद्भाव के साथ रहकर एक दूसरे की संस्कृतियों का सम्मान करते हैं।” यह विचार दुर्ग लोक सभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल ने व्यक्त किए। वे श्री शंकराचार्य विद्यालय हुडको के सभागार में अखिल भारतीय उत्कृष्ट बहुद्देशीय संस्था के सौजन्य से आयोजित कीर्तिशेष श्री राम मोहनन स्मृति सम्मान कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे। उन्होंने 1959 में केरल से भिलाई आकर स्वर्गीय श्री राम मोहन द्वारा भिलाई इस्पात संयंत्र के श्रमिकों के कल्याण के लिए किये गये कार्यों का उल्लेख कर स्मरण किया। उन्होंने कार्यक्रम में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए सम्मानित होने वाली महिलाओं को बधाई भी दी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद् डॉ डीएन शर्मा ने श्री कीर्तिशेष श्री राम मोहनन द्वारा अपने जीवनकाल में 60 बार रक्तदान करने, अपने नेत्र दान करने तथा मृत्यु उपरांत देह दान करने जैसे मानव सेवा की अनुकरणीय पहलों का उल्लेख किया।

स्व श्री राम मोहनन के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन के पश्चात कु नियति शुक्ला द्वारा राज्यगीत के गायन से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। संस्था के अध्यक्ष शानू मोहनन ने अतिथियों का स्वागत किया और उन्होंने अपने पति स्व श्री राम मोहनन के जीवन परिचय से सबको अवगत कराया। उन्होंने बताया कि मृत्योपरांत स्व श्री राम मोहनन का पार्थिव शरीर श्री शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज को दान में दिया गया था।

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कार्यक्रम में प्रख्यात लोकगायिका तेजस्विनी रजनी रजक, नारी सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य करने वाली बी पोलम्मा, कैरियर परामर्शदाता डॉ मिट्ठू तथा श्रीमती विजयलक्ष्मी को कीर्तिशेष श्री राम मोहनन स्मृति सम्मान से नवाजा गया। रंगकर्मी अनीता उपाध्याय, संपादक प्रदीप भट्टाचार्य, सागरिका पाढ़ी व ममता गोस्वामी ने सम्मान के पहले सम्मान पत्रों का वाचन किया।

विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रजनी बघेल व गीतांजलि शिक्षण समिति के डायरेक्टर दीपक शर्मा का अभिनंदन किया गया।

इस अवसर पर श्री स्वरूपानंद महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ हंसा शुक्ला, केरल समाजम के अध्यक्ष वीके मोहम्मद, पार्षद सुनंदा चंद्राकर, कला परंपरा के संपादक डीपी देशमुख, साहित्यकार त्रयंबक राव साटकर, रंगकर्मी विभाष उपाध्याय, प्रीति बेहरा, रत्ना नारमदेव, उर्मिला उपाध्याय, मीनू विष्ट सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन शीतल शर्मा ने किया।

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