सीएम साय को विश्व विख्यात ‘बस्तर दशहरा’ का न्यौता, सांसद महेश कश्यप ने की मुलाकात

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जानें आगामी दिनों कौन से पूजा विधान होंगे

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में बस्तर सांसद महेश कश्यप के नेतृत्व में बस्तर दशहरा समिति, जगदलपुर के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व 2025 में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।

प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि 75 दिनों तक चलने वाला यह पर्व हरेली अमावस्या से प्रारंभ होकर आश्विन शुक्ल पक्ष के 13वें दिन तक मनाया जाता है। इस वर्ष इसकी शुरुआत 24 जुलाई को पाटजात्रा पूजा विधान के साथ हुई है।

आगामी प्रमुख आयोजनों में 21 सितंबर को काछनगादी पूजा, 29 सितंबर को बेल पूजा और 4 अक्टूबर को मुरिया दरबार का आयोजन शामिल है। मुख्यमंत्री साय ने बस्तर दशहरा के आमंत्रण के लिए प्रतिनिधि मंडल का आभार व्यक्त किया और आयोजन की सफलता के लिए बधाई और शुभकामनाएँ दीं।

हरियाली अमावस्या के मौके पर बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मंदिर के सामने गुरुवार को पाट जात्रा पूजा विधान के साथ ही विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व शुरू हो गया है। बस्तर दशहरा पर्व के इस प्रथम पूजा विधान में बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, विधायक जगदलपुर किरण देव, महापौर संजय पाण्डे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और बस्तर दशहरा पर्व समिति के पारंपरिक सदस्य मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरीन, पुजारी-गायता, पटेल, नाईक-पाईक, सेवादार तथा जिला कलेक्टर हरिस एस, अपर कलेक्टर सीपी बघेल एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ ही बड़ी संख्या में जनसमुदाय शामिल हुए।

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औजारों का परम्परागत तरीके से पूजा-अर्चना

बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित इस ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के पहले पूजा विधान पाट जात्रा में रथ निर्माण के लिए बनाए जाने वाले औजार ठुरलू खोटला तथा अन्य औजारों का परम्परागत तरीके से पूजा-अर्चना कर रस्म पूरी की गयी।

 

बस्तर दशहरा पर्व के प्रमुख पूजा विधानों को निर्धारित तिथि अनुसार सम्पन्न किया जाता है। जिसके तहत 5 सितंबर को डेरी गड़ाई, 21 सितंबर को काछनगादी, 22 सितंबर को कलश स्थापना, 23 सितंबर को जोगी बिठाई सहित 24 सितंबर से 29 सितंबर 2025 तक प्रतिदिन नवरात्रि पूजा एवं रथ परिक्रमा, 29 सितंबर को सुबह 11 बजे बेल पूजा, 30 सितंबर को महाअष्टमी एवं निशा जात्रा होगा।

1 अक्तूबर को कुंवारी पूजा, जोगी उठाई एवं मावली परघाव, 2 अक्तूबर को भीतर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा, 3 अक्तूबर को बाहर रैनी एवं रथ परिक्रमा, 4 अक्तूबर को काछन जात्रा एवं मुरिया दरबार होगा। वहीं, 5 अक्तूबर को कुटुम्ब जात्रा में ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई होगी और 7 अक्तूबर को मावली माता की डोली की विदाई के साथ ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व सम्पन्न होगा।

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