पंडवानी से छत्तीसगढ़ को दुनिया भर में मिली है पहचान: मुख्यमंत्री साय

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पंडवानी महासम्मेलन के समापन समारोह में शामिल हुए सीएम

दुर्ग। अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर दुर्ग जिले के ग्राम मेड़ेसरा में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन के समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि थे। छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग रायपुर के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं विधायक अहिवारा डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, पिछड़ा एवं अन्य वर्ग विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विधायक ललित चंद्राकर, विधायक साजा ईश्वर साहू, राज्य तेल घानी बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, पूर्व मंत्री श्रीमती रमशीला साहू एवं जागेश्वर साहू, पूर्व विधायक लाभचंद बाफना एवं डॉ. दयाराम साहू, जिला पंचायत दुर्ग अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती बंजारे, दुर्ग नगर निगम की महापौर श्रीमती अलका बाघमार भी सम्मलित हुए।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पंडवानी एक ऐसी विधा है, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ को दुनिया भर में पहचान मिली है। दुनिया के हर कोने में हमारे पंडवानी कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया है। न्यूयार्क से लेकर पेरिस और लंदन तक महाभारत की कथाओं पर आधारित हमारे पंडवानी गायन को लोगों ने सुना और सराहा है। पद्मश्री डा. उषा बारले जी हमारे बीच मौजूद हैं। उन्होंने अपने पंडवानी गायन के माध्यम से आप सभी का मनोरंजन किया होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मुझे पंडवानी के पुरोधा स्वर्गीय झाड़ूराम देवांगन जी की स्मृति भी हो रही है। हाथ में तंबूरा लेकर जब वे अपनी रोचक प्रस्तुति देते थे तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे। पंडवानी गायन में हमारी महिला कलाकारों को भी विशेष सफलता मिली है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मुझे विशेष रूप से स्वर्गीय लक्ष्मी बंजारे जी का स्मरण हो रहा है। पद्म पुरस्कार देश की विभूतियों को प्राप्त होते हैं। यह छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि हमारी धरती पर तीजन बाई जैसी कलाकार हुई हैं जिन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण तीनों ही सम्मान प्राप्त हुए हैं। जब तंबूरा लेकर वे आलाप करती हैं तो आकाश के देवी-देवता भी उन्हें जरूर सुनते होंगे। उन्होंने बताया कि अनेक अवसरों पर तीजन बाई जी की पंडवानी मैंने सुनी है। श्याम बेनेगल की भारत एक खोज में तीजन बाई के पंडवानी गायन के दृश्य अपार आनंद और उत्सुकता से भर देते हैं। पंडवानी हमारी धरोहर है। आज पंडवानी महासम्मेलन के कार्यक्रम का आयोजन कर आप लोगों ने इस धरोहर को सहेजने और आने वाली पीढ़ी तक इसे बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा कार्य किया है। हम लोगों ने बचपन से रामलीला मंडलियों के माध्यम से रामायण की कहानियां सुनी और पंडवानी के माध्यम से महाभारत की कहानियां सुनी। पीढ़ी दर पीढ़ी रामायण और महाभारत की कहानियां इन्हीं लोककलाकारों के माध्यम से आम जनता तक पहुंचती रही है।

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मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पंडवानी गायन इस मायने में भी खास है कि इसमें महिला और पुरुष का भेद नहीं है अपितु तीजन बाई, डा. उषा बारले जैसे कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से ऐसा महसूस कराया है कि पंडवानी गायन महिलाओं का ही क्षेत्र है। यह इन कलाकारों की कला की सफलता है। पंडवानी गायन के माध्यम से छत्तीसगढ़ समाज की तासीर भी पता चलती है। यहां मातृशक्ति की भागीदारी कला के क्षेत्र में भी बढ़चढ़कर है। उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है। उन्होेंने कहा कि सरगुजा से लेकर बस्तर तक हर जगह की अपनी विशिष्ट संस्कृति है। हमारी सरकार छत्तीसगढ़ी लोककला-संस्कृति को सर्वाेच्च प्राथमिकता देती है। हमने कलाकारों की पेंशन राशि में वृद्धि की है साथ ही कलाकारों को दिये जाने वाले अवसरों की संख्या भी बढ़ाई है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी की स्थापना का निर्णय लेकर हमने छत्तीसगढ़ी सिनेमा को मजबूत करने का जतन किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जब अटल जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया तो इसके पीछे इस राज्य के तेजी से विकास की मंशा के साथ ही इसकी संस्कृति को सहेजने की मंशा भी थी। आज जब यह सुंदर आयोजन देखने में आ रहा है तो मन में सुकून के भाव आते हैं कि अटल जी की मंशा पूरी हुई। उन्होंने अवगत कराया कि 1 नवंबर को प्रदेश की रजत जयंती मनाई जाएगी। यह राज्योत्सव हमारी लोकसंस्कृति का उत्सव होगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आगमन भी होगा। मुख्यमंत्री ने सभी से अनुरोध किया कि रजत जयंती समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज कर हमारा मान बढ़ाएं।

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मुख्यमंत्री श्री साय ने क्षेत्रीय विधायक श्री कोर्सेवाड़ा की मांगों का जिक्र करते हुए नागरिक कल्याण महाविद्यालय नंदिनी में स्नातकोत्तर कक्षाएं खोलने, अछोटी में बीएड महाविद्यालय, मेड़ेसरा को आदर्श गांव बनाने के साथ ही समुदायिक भवन हेतु 20 लाख रूपए और क्षेत्र के सभी पंचायतों में सीसी रोड निर्माण की घोषणा की। साथ ही कलाकारों को भरोसा दिलाया कि उनके सभी मांगों पर सरकार विचार कर आवश्यक पहल करेगी।

कार्यक्रम के अध्यक्ष उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सभी पंडवानी कलाकारों का अभिनन्दन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कला और संस्कृति के लिए देश दुनिया मे पहचाना जाता है। छत्तीसगढ़ कलाकारों से परिपूर्ण राज्य है। उन्होंने 1 नवंबर को राज्योत्वस में शामिल होने रायपुर आमंत्रित किया।

 

क्षेत्रीय विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी ने जिस भरोसा के साथ मुझे अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष का दायित्व सौंपा है उसमें खरा उतरने का पूरा प्रयास करूंगा। उन्होंने विधान सभा क्षेत्र अहिवारा के विकास हेतु राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करायी गई राशियों का जिक्र किया। साथ ही क्षेत्र के और विकास हेतु मांग पत्र मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री श्री साय को सौपा। कार्यक्रम के संयोजक पद्मश्री डॉ. ऊषा बारले ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस और पंडवानी महासम्मेलन आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। साथ ही कार्यक्रम में उपस्थिति हेतु मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री श्री साय सहित सभी अतिथियों का आभार माना। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा संभाग आयुक्त एसएन राठौर, आईजी आरजी गर्ग, कलेक्टर अभिजीत सिंह, एसएसपी विजय अग्रवाल सहित अन्य अधिकारीगण, पंडवानी के लोक कलाकार और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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