जनकपुर20 घंटे पहले
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भरतपुर ब्लॉक के जनकपुर वन परिक्षेत्र में मंगलवार की रात गांव में बाघ के घुसने से हडकंप मच गया। हालांकि ग्रामीणों के शोर मचाने पर बाघ गांव से लगे जंगल की ओर भाग कर छिप गया है। मामले में वन अधिकारी ने कहा कि पंजे का निशान पुराना भी हो सकता है। इस सब के बीच वन अमला अभी भी तेमोर पिंगला से मंगाए गए हाथी से जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार कुंवारपुर वन परिक्षेत्र के ग्राम रेद में मंगलवार की रात 10 बजे बाघ के घुसने की जानकारी मिली। ग्रामीण घर से बाहर निकलकर शोर मचाने लगे। जिससे बाघ भाग कर गांव से लगे जंगल की ओर चला गया। बीते एक महीने के भीतर जनकपुर, कुंवारपुर वन परिक्षेत्र में बाघ का चार से अधिक बार मूवमेंट देखा गया, लेकिन अभी तक किसी प्रकार से जानमाल को नुकसान नही पहुंचा है।
इन दिनो बाघ और तेंदुए के आंतक से ग्रामीण दहशत में है, तो दूसरी ओर वनकर्मियों के द्वारा लगातार प्रभावित क्षेत्रों में मुनादी करा ग्रामीणों को रात में घर से बाहर निकलने मना किया जा रहा है। वहीं दिन में भी जंगल की ओर जाने से सावधान किया गया है।
बाघ के पंजे के निशान पुराने: वन विभाग
रेद के ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने मंगलवार की रात बाघ के दहाड़ने की आवाज सुनी। इसके बाद उन्होंने टॉर्च और आग जलाया और शोर मचाते हुए घरों से बाहर निकले। जिससे बाघ गांव से लगे जंगल की ओर चला गया है। गांव में बाघ के घुसने की जानकारी मिलने पर वन अधिकारी और कर्मचारी पहुंचकर पंजे के निशान का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यह निशान पुराना है, लेकिन ग्रामीणों की माने तो मंगलवार को बाघ के आने से पहले यहां कोई निशान नहीं देखा गया था।
पहले भी तेंदुआ ग्रामीणों पर कर चुका है हमला: रेंजर ध्रुव
कुंवारपुर वन परिक्षेत्र के रेंजर शिव प्रसाद ध्रुव ने बताया कि बाघ और तेंदुए के लिए जनकपुर के जंगल में अनुकूल वातावरण है। यहां हमेशा ही तेंदुए और बाघ का मूवेमेंट होती रहती है। बाघ और तेंदुआ बकरी, मवेशियों का शिकार कर अपना भोजना बनाते है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, लेकिन बीते महीने ग्रामीणों पर हमला करने से मामला ज्यादा हाइलाइट हुआ है। बाघ के मूवमेंट की निगरानी की जा रही है। ग्रामीणों को उसके लोकेशन की जानकारी दी जा रही है। ताकि कोई हानि न हो।
जनकपुर परिक्षेत्र में 5 से 6 तेंदुआ
वनकर्मियों ने बताया कि ब्लॉक जनकपुर के सभी वन परिक्षेत्र में 5 से 6 तेंदुआ है। साथ ही आए दिन संजय गांधी नेशनल पार्क से बाघों का आना-जाना लगा रहता है। बता दें कि तीन ग्रामीणों पर हमला कर मारने वाले जिस तेंदुए को पकड़ कर जंगल सफारी ले जाया गया है, उसके बाद भी कुंवारपुर रेंज में बकरी के शिकार की घटना सामने आई है। मंगलवार की रात बाघ के आने से खेत में पंजे के निशान मिले हैं।
