जगदलपुर33 मिनट पहले
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भाजपा के नेताओं ने छुई खदान पहुंच जांच की।
छ्त्तीसगढ़ में बस्तर के छुई खदान में हुई 6 ग्रामीणों की मौत के बाद भाजपा की एक जांच कमेटी सप्ताहभर बाद स्पॉट पहुंची। भाजपा की 5 सदस्यीय टीम ने मौके का निरीक्षण किया। मृतकों के परिजनों और घायलों से मुलाकात की। कमेटी का कहना है कि, जांच में पता चला जिस छुई खदान में 6 ग्रामीणों की मौत हुई वह अवैध थी। फॉरेस्ट की जमीन में सरकार के संरक्षण में ठेकेदार अवैध उत्खनन कर रहे थे। इसमें अफसरों की भी मिलीभगत थी। कमेटी ने मृतकों के परिजनों को 1-1 करोड़ और घायलों को 20-20 लाख देने की मांग की है।
जानकारी के मुताबिक, बस्तर जिले के मालगांव में हादसा हुआ था। इस हादसे के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव के निर्देश में 5 सदस्यीय जांच टीम बनाई गई थी। इस टीम में पूर्व मंत्री केदार कश्यप, पूर्व प्रदेश महामंत्री किरणदेव, पूर्व विधायक डॉ सुभाऊ कश्यप, भाजपा जिला अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी एवं जिला पंचायत सदस्य सरिता पानीग्राही शामिल थी। जांच टीम मौके पर पहुंचकर सबसे पहले मृतकों के घर पहुंच परिजनों से मुलाकात की। फिर घायलों से मुलाकात कर उनका हाल जाना।

परिजनों से मुलाकात करते नेता।
कमेटी के सदस्य पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने आरोप लगाया है कि, सरकार के संरक्षण में यहां मुरुम का अवैध उत्खनन हो रहा था। ग्रामीण यहां से छुई मिट्टी निकालने के लिए पहुंचे थे और यह हादसा हो गया। उन्होंने कहा कि, यह पूरी जमीन फॉरेस्ट की है इसमें अफसरों की मिलीभगत थी। इसी वजह से ठेकेदार यहां से मुरूम का अवैध उत्खनन कर रहे थे। 6 मौतों की जिम्मेदार छ्त्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार है। केदार ने कहा कि इस हादसे में जिन 6 लोगों की मौत हुई है उनके परिजनों को सरकार 1-1 करोड़ रुपए दे।
बंजर खेत से मुरुम निकालते थे लोग
जब दैनिक भास्कर की टीम ने मामले की ग्राउंड रिपोर्ट की तो पता चला कि, यह कोई खदान नहीं थी। बल्कि एक बंजर खेत था। यहां से अवैध तरीके से मुरुम का उत्खनन किया जाता था। मुरुम की खुदाई के दौरान ग्रामीणों को पता चला कि यहां पर छुई मिट्टी है। जिसके बाद हर दिन इलाके के लोग यहां से मिट्टी निकालने के लिए पहुंचे थे। धीरे-धीरे इसका नाम छुई खदान पड़ गया। अब सवाल यह उठता है कि, यहां से आखिर मुरुम कौन लेकर जा रहा था? क्या प्रशासन को इसकी भनक नहीं थी? इस अवैध खदान के पीछे क्या सरपंच, सचिव की भी भूमिका रही है? फिलहाल यह जांच का विषय है।

ऐसे दबे थे लोग।
गरीबी की वजह से इस्तेमाल करते थे
कुछ ग्रामीणों ने कहा कि, छुई मिट्टी का उपयोग घर की पुताई के लिए करते थे। आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीणों के पास दुकानों से चुना खरीदने पैसा नहीं होता था। तो इसी मिट्टी से पुताई कर अपना काम चलाते थे। ऐसा करने वाले गांव के एक या दो लोग ही नहीं बल्कि कई परिवार थे। इस हादसे के बाद ग्रामीणों के कपड़े, चप्पल समेत कुछ सामान मौके पर ही पड़े हुए हैं।
