
दुर्ग न्यूज, (श्योपुर) । कूनो नेशनल पार्क से चीतों को शिफ्ट किए जाने को लेकर विगत दिनों केंद्रीय व राज्य के वनमंत्रियों के विरोधाभासी बयान सामने आए हैं।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव साफ कर चुके हैं कि कूनो से चीते कहीं नहीं भेजे जाएंगे, वहीं प्रदेश के वनमंत्री विजय शाह का कहना है कि कुछ चीते जल्द शिफ्ट किए जाएंगे। इन बयानों के बीच प्रदेश के मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक असीम श्रीवास्तव ने स्थिति साफ कर दी है। उनका कहना है कि कूनो से चीतों को कहीं और नहीं भेजा जाएगा। गांधीसागर अभयारण्य तैयार किया जा रहा है, आयातित नए चीतों के लिए।

अफ्रीकी देशों से और आएंगे चीते
श्रीवास्तव का कहना है कि अफ्रीकी देशों से अभी और चीते लाए जाने हैं। अब जो नए चीते आएंगे, उन्हें सीधे गांधीसागर अभयारण्य में ही उतारे जाने की संभावना है। इन चीतों के लिए अभयारण्य दिसंबर अंत तक तैयार हो जाएगा।
एक चीता निर्वा अभी भी बाड़े से बाहर
उन्होंने बताया खुले जंगल में छोड़े गए चीतों में से एक को छोड़कर सभी पकड़ लिए गए हैं। कालर आईडी निकालकर उन्हें बाड़ों में रखा गया है। वर्षाकाल के बाद इन्हें एक बार फिर तात्कालिक परिस्थितियों को देखकर खुले जंगल में छोड़ने का निर्णय लिया जाएगा।
कालर आईडी लगाएंगे या नहीं, इस पर श्रीवास्तव कहते हैं कि कालर आइडी के बगैर तो चीतों को खुले जंगल में छोड़ पाना, संभव नहीं है। क्योंकि उसके बिना उनकी मानिटरिंग नहीं हो पाएगी।
चीता प्रेमियों को अब मादा चीता निर्वा की चिंता सता रही है। निर्वा की गर्दन पर बंधी कालर आईडी खराब होने के कारण बीत दिनों से उसका लोकेशन नहीं मिल सका है। उसे अंतिम बार जिस स्थान पर देखा गया, मैदानी वन कर्मचारियों की टोलियां उसे उसके आसपास के क्षेत्र में खोज रही हैं। कुछ दिनों से निर्वा का कोई पता नहीं है।
इससे पहले वह टिकटोली व मोरावन क्षेत्र में गश्ती दल को दिखाई भी दी, पर उसे ट्रैंकुलाइज नहीं किया जा सका, क्योंकि ट्रैंकुलाइज करने में पांच से दस मिनट का समय लगता है और निर्वा उतना समय ही नहीं देती है। जैसे ही कर्मचारी आसपास पहुंचते हैं, वह भाग जाती है। वन अधिकारियों के मुताबिक उसकी गर्दन में कोई संक्रमण नहीं है।
