ठगड़ा बांध का नामकरण, दानवीर राय साहब दाऊ माधो प्रसाद चन्द्राकर के नाम से जाना जाएगा

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दुर्ग न्यूज, 4 अक्टूबर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा ठगड़ा बांध का वर्चुअल लोकार्पण करने के पश्चात आज उक्त बांध का नामकरण किया गया। राय साहब दाऊ माधो प्रसाद चंद्राकर जलाशय एवं राय साहब दाऊ माधो प्रसाद चंद्राकर वाटिका का लोकार्पण विधायक अरुण वोरा, महापौर धीरज बाकलीवाल, सभापति राजेश यादव द्वारा किया गया। इस अवसर पर‌ पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर, मुकेश चंद्राकर, लक्ष्मण चंद्राकर, डॉ विशाल चन्द्राकर, डॉ. बीएल चंद्राकर, प्रताप चंद्राकर, नेमीचंद चंद्राकर,नारायण चन्द्राकर नवनीत चन्द्राकर हीरामणी चंद्राकर, उत्तम चंद्राकर, प्रताप चंद्राकर, अरविंद चन्द्राकर, क्षितिज चन्द्राकर, नितिश चंद्राकर महिला समाज के पूर्व महापौर चन्द्रिका चंद्राकर, सुषमा चन्द्राकर रमा चन्द्राकर, प्रमिला चंद्राकर, श्यामादेवी चंद्राकर, हेमवती नन्दन चन्द्राकर, सुनंदा चन्द्राकर पप्पू चन्द्राकर, नीता जैन, ललित चन्द्राकर, अब्दुल गनी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इस अवसर पर महापौर बाकलीवाल एवं विधायक अरूण वोरा द्वारा चंदन का पौधा रोपा गया।अतिथियों ने क्षेत्र की जीवनदायनी ठगड़ा बांध को दान में देने वाले राय साहब दाऊ माधो प्रसाद चंद्राकर के समस्त परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया।

 

राय साहब दाऊ माधो प्रसाद चंद्राकर जलाशय का संक्षिप्त परिचय

 

ग्राम आमदी स्थित ठगड़ा बांध का निर्माण ग्राम आमदी के लंबरदार एवं मालगुजार राय साहब दाऊ माधो प्रसाद चंद्राकर (ठगड़ा दाऊ) द्वारा सन् 1870 से 1923 के कालखंड में विभिन्न चरणों में किया गया।

 

पश्चात् इसका संधारण सिंचाई विभाग द्वारा किया जा रहा है। यह जलाशय आसपास के क्षेत्रों के लिए आजादी के पूर्व सिंचाई का प्रमुख साधन था।

 

रायसाहब दाऊ माधो प्रसाद चंद्राकर एवं अर्द्धांगिनी श्रीमती गजराबाई चंद्राकर द्वारा श्रीराम जानकी मंदिर (आमदी मंदिर), रेल्वे स्टेशन, दुर्ग एवं श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर सेक्टर-9, ग्राम आमदी, भिलाई की प्रतिष्ठा भी उन्हीं के द्वारा की गयी है। जिसमें दानवीर रायसाहब दाऊ माधो प्रसाद चंद्राकर एवं गजरा बाई चंद्राकर द्वारा 9 गांव दान में दिये गये हैं।

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रायसाहब दाऊ माधो प्रसाद चंद्राकर सेन्ट्रल प्राविंस एवं बरार (CP & Barar) के सम्मानित जूरी के जज के रूप में मनोनीत रहे। राय साहब दाऊ प्रसाद चंद्राकर को कृषि रत्न की उपाधि से नवाजा गया था। कृषि क्षेत्र में रोपाई की शुरुआत भी उन्होंने ही की थी।

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