भागवत कथा पंडाल में 500 किलो फूलों से खेली होली

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कथा के अंतिम दिन देवी चित्रलेखा जी ने सुदामा चरित्र एवं पंडाल में फूलों की होली का आयोजन किया। फूलों की होली का पूरे पंडाल में श्रद्धालुओं ने आनंद लिया।
दुर्ग न्यूज, 9 फरवरी।‌ आज की कथा में देवी जी ने कहा कि अपने सनातन धर्म पर अडिग रहो। चाहे कैसी भी परिस्थिति हो सच्चे वैष्णव की तरह दुख-सुख दोनों परिस्थिति में समान रहो। सुख में न वो फूलता है और दुख में न डूबता है।
सुख में मनुष्य सरकती रेती जैसा बन जाता है, समय कब बीत गया पता ही न चला और दुख में मनुष्य के हृदय में कांटा जैसा चुभता है, लेकिन दोनों ही स्थिति में वैष्णव को स्थिर रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार माँ बाप अपने सन्तान की रक्षा करते हैं उसी प्रकार अपने भक्तों की रक्षा भगवान करते हैं। कथा के सप्तम दिवस आज देवी चित्रलेखा ने कथा आरंभ करते हुए भगवान् के 16,108 विवाह का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान् की 8 मुख्य पटरानी हुई और बताया कि एक भौमासुर नामक दैत्य एक लाख कन्याओं के साथ विवाह करने के उद्देश्य से उन्हें बंदी बना कर रख रहा था ।
तब उन कन्याओं के जीवन की रक्षा के लिए भगवान् ने उस दैत्य का संहार किया और उन कन्याओं को कैद से बचाया मगर जब कन्याओं ने कहा कि इतने वक़्त परिवार से दूर रहने के बाद उन्हें कौन स्वीकार करेगा। तो उन्हें इस लांछन से बचाने के लिए भगवान् ने उन 16,100 कन्याओं से विवाह किया।
आगे सुदामा चरित्र एवं सुदामा मिलन की कथा सुनाई, इसके पश्चात कथा के मुख्य प्रसंगों को श्रवण करा कथा सार सुनाया। कथा विश्राम से पहले फूल होली का उत्सव हुआ और महाआरती के साथ सप्तम दिवस की कथा को विश्राम दिया गया। कार्यक्रम की समाप्ति पर भंडारा प्रसादी का आयोजन कथा स्थल पुरानी गंजमडी में किया गया।

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