बिलासपुर7 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

जिले के तीन रेत घाटों के नीलामी की तैयारी खनिज विभाग द्वारा की जा रही है लेकिन दूसरी ओर बंद घाटों में अवैध उत्खनन जारी है।
जिले के तीन रेत घाटों के नीलामी की तैयारी खनिज विभाग द्वारा की जा रही है लेकिन दूसरी ओर बंद घाटों में अवैध उत्खनन जारी है। खनिज विभाग इन पर रोक नहीं लगा पा रहा है। सोमवार को खनिज विभाग की टीम ने घुटकू, कोनी, सेंदरी, निरतु, तुर्काडीह व कछार घाट जाकर जेसीबी से रास्तों को खुदवाया। इसके पीछे मकसद ये है कि रेत की चोरी पर रोक लगाई जा सके। हालांकि पहले भी ऐसा किया जा सके लेकिन रेत के अवैध उत्खनन व परिवहन पर रोक नहीं लग सकी।
हाल ही में खनिज विभाग ने लक्षनपुर, अमलडीहा व उदईबंद रेत घाट को ठेके पर देने के लिए सूचना जारी की। लोडिंग चार्ज का रेट बढ़ाए जाने की वजह से रेत के रेट बढ़ना तय है। लोडिंग चार्ज प्रति घनमीटर 90 रुपए से बढ़ाकर 120 रुपए किया गया है। इस बार एक व्यक्ति को एक ही घाट का ठेका दिए जाने की बात कही जा रही है। तीन घाटाें के लिए बंद लिफाफे में बोली आमंत्रित की गई है।
एक तरफ जहां इन तीन घाटों को नीलाम करने की तैयारी है, वहीं घुटकू, कोनी, सेंदरी, निरतु, तुर्काडीह, कछार सहित सभी घाटों से धड़ल्ले से रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। केवल दो घाट पहंदा और रतखंडी ही चालू है जबकि बाकी सभी घाट कागजों में बंद है। इनकी ठेका अवधि समाप्त हो चुकी है। बावजूद इसके यहां 24 घंटे रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है।
घुटकू घाट का रास्ता नहीं काटने पर सवाल
कोनी, सेंदरी, निरतु, तुर्काडीह व कछार से कहीं ज्यादा रेत घुटकू से निकाली जा रही है। यहां से तो रात में हाइवा से रेत की सप्लाई की जा रही है। रोजाना रात में मंगला चौक से हर 10 से 15 मिनट के भीतर एक हाइवा गुजरती है। घुटकू घाट की ठेका अवधि भी समाप्त हो चुकी है लेकिन यहां पर रेत के अवैध उत्खनन पर खनिज विभाग के अधिकारी रोक नहीं लगा सके। अधिकारियों ने इस घाट के रास्ते को जेसीबी से भी नहीं खुदवाया है। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। बता दें कि ज्वाइन करने के कुछ ही दिन बाद कलेक्टर सौरभ कुमार ने इस घाट में जाकर धड़ल्ले से उत्खनन होते देख कार्रवाई के निर्देश दिए थे। दिखावे के लिए कार्रवाई की गई लेकिन फिर से यहां रेत की चोरी जारी है।
वाहन मालिकों का नाम सामने लाने से क्यों घबराते हैं अफसर
13 से 16 जनवरी के बीच रेत घाटों में 20 वाहनों के खिलाफ केस बनाने का दावा किया जा रहा है। हालांंकि वाहनों के मालिक कौन है और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, इसके बारे में ख खनिज विभाग के अधिकारी कुछ भी नहीं बता रहे हैं। इससे पहले भी खनिज विभाग के अधिकारी रेत चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का दावा करते रहे हैं लेकिन वे इस बारे में जानकारी देने से बचते रहे हैं। घुटकू में वाहन मालिकों का नाम खनिज विभाग ने छिपा लिया। यह भी नहीं बताया कि क्या कार्रवाई की, कितना जुुर्माना किया।
भास्कर इनसाइट – माफिया बना लेते हैं नया रास्ता, नेटवर्क मजबूत
घुटकू, कोनी, सेंदरी, निरतु, तुर्काडीह, कछार घाट के रास्ते को खनिज विभाग ने जेसीबी से खुदवाया है। पहले भी खनिज विभाग के अधिकारी रेत घाट जाने वाले रास्तों को जेसीबी से खुदवा चुके हैं लेकिन माफिया हर बार रेत चोरी करने नया रास्ता बना लेते हैं। बता दें कि खनिज अधिकारियों से ज्यादा मजबूत नेटवर्क रेत माफियाओं का है। जैसे ही खनिज विभाग के अधिकारी छापेमारी के लिए कलेक्टोरेट स्थित अपने दफ्तर से रवाना होते हैं, रेत चोरी कर रहे लोगों को इसकी सूचना मिल जाती है। यहीं वजह है कि रेत घाट से ज्यादातर वाहन हटा लिए जाते हैं।
जिन तक सूचना नहीं मिल पाती, उनके ही वाहन अधिकारी पकड़ पाते हैं। इतना ही नहीं, माफिया अधिकारियों के वाहनों का पीछा भी करते हैं। इसकी शिकायत अधिकारी अपने आला अधिकारी भी कर चुके हैं। अधिकारी रसूखदार रेत माफियाओं से डरते भी हैं। यहीं वजह है कि कई जगह वे कार्रवाई करने से बचते हैं।
