जशपुर बिहार का हिस्सा होगा या एमपी में जाएगा इसी विवाद के बीच मना था पहला गणतंत्र दिवस | Will Jashpur be a part of Bihar or will it go to MP? The first Republic Day was celebrated amidst this controversy.

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जशपुरनगर14 घंटे पहलेलेखक: आशीष मिश्रा

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जशपुर में गणतंत्र दिवस पर पहली बार तिरंगा जब फहराया गया था, तब जशपुर में तनावपूर्ण स्थिति थी। यह तय नहीं हो सका था कि जशपुर बिहार राज्य का हिस्सा रहेगा या फिर इसे एमपी में शामिल किया जाएगा। कुछ लोग बिहार का हिस्सा बनाने की मांग उठा रहे थे, तो सरकार इसे एमपी के नक्शे में ढाल रही थी। इसी बीच गणतंत्र दिवस पर सरकारी कार्यालयों और स्कूलों में राष्ट्रध्वज फहराने की घोषणा रेडियो पर हुई।

जशपुर में पहले गणतंत्र दिवस को लेकर यह बातें शहर के वरिष्ठ नागरिक, सेवा निवृत्त शिक्षक कर्म दयाल मिश्रा ने भास्कर को बताई। 85 वर्षीय कर्म दयाल मिश्रा ने भास्कर ने पहले गणतंत्र दिवस को लेकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि उस वक्त वे कक्षा पांचवीं के छात्र थे और घोलेंग मिशन स्कूल में पढ़ाई करते थे। जशपुर उस वक्त एक छोटा कस्बा था। उन्होंने बताया कि उस वक्त सिर्फ एक ही बात की चर्चा बड़े लोग बैठकर करते थे कि जशपुर को मध्यप्रदेश में रखा जाएगा या यह बिहार का हिस्सा हेागा।

यदि बिहार का हिस्सा होता तो जशपुर की राजधानी रांची होती। सन 1950 के पहले गणतंत्र दिवस पर उनके स्कूल में तिरंगा फहराने के बाद मिठाई बांटी गई और छुट्‌टी दे दी गई। पहले गणतंत्र दिवस के मौके पर भाषण में यह तक नहीं बताया गया था कि यह पर्व क्यों मनाया जा रहा है और इसका क्या महत्व है।

इसके बाद के हर गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण के बाद सभी स्कूलों में गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है और इसका क्या महत्व है, इसका भाषण आवश्यक रूप से होता था। ताकि स्कूली बच्चों को लोकतंत्र की जानकारी हो, संपूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न लोकतांत्रिक गणराज्य के महत्व को लोग समझ सकें।

वतर्मान में गणतंत्र दिवस की भव्यता कई गुना ज्यादा हो चुकी कर्मदयाल मिश्रा बताते हैं कि समय के साथ राष्ट्रीय पर्व की भव्यता भी बढ़ रही है। अब गांव-गांव के स्कूल व पंचायतों में सांस्कृति कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जिला स्तर पर भव्य समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय पर्व को लेकर उत्साह और उल्लास अब ज्यादा है। उस वक्त भी राष्ट्रीय पर्व को लेकर लोगों में उत्साह हुआ करता था। पर्व की तैयारी 15 दिन पहले से शुरू हो जाती थी। स्कूलों की रंगाई-पुताई से लेकर ध्वज चबूतरे को सजाने का काम किया जाता था।

सांस्कृतिक कार्यक्रम बाद में आए पहले खेलों का होता था आयोजन
कर्मदयाल मिश्रा ने बताया कि उन्होंने शासकीय स्कूल लोदाम, पैकू, सारंगढ़ नवापाली, लवाकेरा, अंकिरा, पाड़ातराई, ठूठीअंबा और बुनियादीशाला जशपुर में अपनी सेवाएं दीं। सभी शासकीय स्कूलों में शुरुआती दौर में गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडा फहराने के बाद जुलूस निकाला जाता था। बच्चों को मिठाईयां बांटकर स्कूलों में छुट्‌टी दे दी जाती थी। स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन बाद में शुरू हुआ। जिससे राष्ट्रीय पर्व को लेकर बच्चों में उत्साह और ज्यादा बढ़ गया। ऐसे मौके पर पहले गांव में फुटबाॅल या हॉकी के मैच खेले जाते थे।

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