SECL खदानों का ऐतिहासिक बंद, कोयला उत्पादन और परिवहन ठप

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० कोरबा ऊर्जाधानी भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति के तत्वावधान में आंदोलन

छत्तीसगढ/कोरबा। ऊर्जाधानी भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति के तत्वावधान में दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की कोयला खदानों में भू-विस्थापितों ने मंगलवार को पहली बार एकजुट होकर ऐतिहासिक बंद का आह्वान किया। इस आंदोलन ने कुसमुंडा, दीपका, गेवरा और कोरबा क्षेत्र की खदानों में कोयला उत्पादन, मिट्टी उत्खनन और परिवहन कार्य को पूरी तरह ठप कर दिया। सुबह 6 बजे से कुसमुंडा क्षेत्र में और 8 बजे से दीपका-गेवरा क्षेत्र की खदानों में शुरू हुए इस प्रदर्शन ने SECL प्रबंधन के खिलाफ भू-विस्थापितों के आक्रोश को उजागर किया।

कुसमुंडा क्षेत्र में व्यापक प्रदर्शन

कुसमुंडा क्षेत्र के पाली, पडनिया, रिसदी, जटराज, खोडरी, गेवरा बस्ती सहित सात से अधिक गांवों के सैकड़ों लोग समिति के नेतृत्व में सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने SECL महाप्रबंधक का पुतला दहन किया और विशाल रैली निकाली भिलाई बाजार के मुहाने पर खदान कार्य को पूरी तरह बंद कराया गया। आंदोलन में सभी आउटसोर्सिंग कंपनियों के कर्मचारियों और ठेका कामगारों ने भी समर्थन जताया, ड्यूटी का बहिष्कार कर वाहनों को खड़ा कर दिया ।

गेवरा और दीपका में खनन कार्य रुका

गेवरा खदान के नराईबोध, रलिया, आमगांव फेस को प्रदर्शनकारियों ने बंद करा दिया। इसी तरह, दीपका क्षेत्र के अमगांव, दर्राखांचा, मलगांव और सुवाभोंडी फेस की खदानों में भी उत्पादन और परिवहन कार्य पूरी तरह ठप रहा। कोरबा क्षेत्र की सराईपाली परियोजना में सुबह से ही धरना शुरू हो गया, जिसने खदान के सभी कार्यों को रोक दिया।

भू-विस्थापितों का पहला एकजुट आंदोलन

ऊर्जाधानी भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति के बैनर तले यह पहला अवसर है जब भू-विस्थापितों ने SECL की सभी प्रमुख खदानों को एक साथ बंद करने का कदम उठाया। प्रदर्शनकारी लंबे समय से उचित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार के अवसर जैसी मांगों को लेकर SECL प्रबंधन से नाराज हैं। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने SECL के रवैये के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

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एसईसीएल की समस्याओं पर चर्चा के लिए पेशकश

आंदोलन को देखते हुए SECL के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक सहित सभी बोर्ड मेम्बर के साथ 22 अप्रैल को एक उच्च स्तरीय बैठक एसईसीएल मुख्यालय में होगी। उससे पहले क्षेत्रीय बैठक आयोजित की जाएगी। उस बैठक में भू-विस्थापितों की सभी समस्याओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा और प्रबंधन द्वारा उनकी मांगों का समाधान निकाल जाएगा। इस आश्वासन के बाद हड़ताल को स्थगित करने का निर्णय लिया गया।

प्रभाव और भविष्य

इस बंद से SECL की कोयला आपूर्ति और उत्पादन पर तात्कालिक असर पड़ा है, जिसका प्रभाव क्षेत्रीय बिजली संयंत्रों और अन्य उद्योगों पर भी पड़ सकता है। समिति के नेतृत्व में भू-विस्थापितों का यह आंदोलन न केवल उनकी एकजुटता को दर्शाता है, बल्कि कोयला उद्योग में सामाजिक और भू-विस्थापितों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है ।

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