हे भगवान! इस विभाग में खड़ी गाडिय़ां भी पी रही सैकड़ों लीटर डीजल

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दुर्ग। दुर्ग नगर निगम में भ्रष्टाचार चरम पर है। खासतौर पर निगम में कांग्रेस की सत्ता आने के बाद जिस तरह की लूटखसोट मचाकर रखी गई है, वैसा कोई दूसरा उदाहरण प्रदेश में देखने को मिलता। अब तक पीडब्ल्यूडी, जलगृह विभाग, राजस्व व बाजार विभाग के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के चर्चे रहे, लेकिन फिलहाल नगर निगम के लोककर्म विभाग के कार्यकलापों ने बाकी सारे विभागों को पीछे छोड़ दिया है। इस विभाग के तहत वाहनों का मेन्टमेंस और उनके खर्चे शामिल है। यानी नगर निगम में जितने भी वाहन चलते हैं, उन पर होने वाले तमाम खर्च इसी विभाग के मातहत है। कुछ समय पहले तक इस विभाग की ओर कोई झांकता तक नहीं था। लाइम लाइट में रहने वाला यह विभाग यदि अब अचानक खुलकर सामने आया है तो उसकी सबसे बड़ी वजह वाहनों के मेन्टमेंस से लेकर उन पर होने वाले खर्चों में भारी-भरकम भ्रष्टाचार है।

सालभर पहले तक राजस्व अधिकारी का काम करने वाले युवा शोएब खान को अचानक ही नगर निगम के कर्मशाला विभाग का प्रभारी बना दिया गया। जितना आश्चर्यजनक शोएब को कर्मशाला प्रभारी बनाया जाना था, उससे कहीं ज्यादा आश्चर्यजनक यह भी था कि कुछ ही महीनों में शोएब का रहन-सहन पूरी तरह से बदल गया। जिस पद पर शोएब की नियुक्ति की गई, वहां मेकेनिकल इंजीनियर स्तर का अफसर होना चाहिए था, किन्तु भ्रष्ट अफसरों और जनप्रतिनिधियों की सोच ने इस विभाग को थोपा गया अफसर दिया। पदों पर बैठे अफसरों की सोच होनी चाहिए कि किस तरह अपने संस्थान के हित में खर्चों में कमी लाए, लेकिन शोएब की नियुक्ति के बाद वाहनों के मेन्टमेन्स से लेकर उनके डीजल-पेट्रोल के खर्च बढ़ते चले गए।

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बताया जाता है कि शोएब खान की नियुक्ति से पहले तक नगर निगम को हर महीने वाहनों में डीजल भरवाने पर लगभग १० लाख रूपए खर्च करने पड़ते थे, लेकिन जिस तरह से भ्रष्टाचार बढ़ता चला गया, उसके बाद यह राशि १६ से १८ लाख तक पहुंच गई। जानकारों के मुताबिक, लम्बे समय से कर्मशाला के उन वाहनों में भी डीजल डलवाया जाता रहा है, जो या तो कंडम होकर खड़े हैं या फिर खराब पड़े हैं। इन वाहनों में सैकड़ों लीटर डीजल की खपत दर्शाई जा रही है। जाहिर है कि खड़े वाहनों में डीजल डलवाने के नाम पर खुलकर भ्रष्टाचार किया गया। इसी आधार पर हर महीनों लाखों रूपयों का खुला खेल चल रहा है। इस पूरे मामले में महापौर से लेकर कई अफसरों की भूमिका तो संदेहास्पद है ही, एमआईसी प्रभारी पर भी उंगलियां उठ रही है। बात सिर्फ डीजल के नाम पर घोटाला करने की ही नहीं है, बताया जाता है कि नगर निगम के वाहनों में आने वाली छिटपुट खराबी पर भी हजारों रूपयों के बिल बनाकर जमा करवाए गए। आशय यह कि कई कार्य जो सौ-पचास रूपए में होने वाले थे, उन पर हजारों रूपए व्यय होना दिखाया गया।

कमिश्नर ने बुलाया तो काटी कन्नी

बताते हैं कि शुक्रवार को जब यह सारा मामला नए कमिश्नर प्रकाश सर्वे के संज्ञान में आया तो उन्होंने विभिन्न विभागों की बैठक बुलाई। कर्मशाला विभाग को भी बैठक में शामिल होना था, किन्तु इस विभाग का प्रभारी शोएब खान बैठक में शामिल ही नहीं हुआ। इस पर कमिश्नर ने नाराजगी भी जाहिर की। सूत्र बताते हैं कि कर्मशाला प्रभारी अपनी करनी की वजह से बुरी तरह से फंस गया है। उसकी कारगुजारियों के नए-नए कारनामे रोजाना उजागर हो रहे हैं। इन हालातों में नगर निगम के कई अफसरों ने मोर्चा संभाला था। कर्मशाला प्रभारी शोएब को बच्चा बताकर पूरे मामले को ही रफा-दफा करने की कोशिशें ते•ा कर दी गई है। जीएफ न्यू•ा अपनी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए कर्मशाला विभाग की गड़बडिय़ों को लगातार उजागर करता रहेगा।

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