
– चार दिनों से पानी के लिए तरस रहे लोगों में गहराया आक्रोश

दुर्ग। इसे नगर निगम की लापरवाही कहें या स्थानीय पार्षद की निष्क्रियता कि ईद के पाक मौके पर भी लोगों को पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ा। शहर के तकियापारा वार्ड में विगत ४ दिनों से पानी की गम्भीर किल्लत बनी रही। इसकी न नगर निगम के जिम्मेदार लोगों ने सुध ली, न वार्ड के पार्षद ने। जबकि स्थानीय नागरिकों ने बार-बार जिम्मेदार लोगों का ध्यान आकृष्ट कराया। नगर निगम की अमृत मिशन योजना पूरी तरह से फ्लॉप होने के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों में जलापूर्ति नहीं करने को लेकर जनप्रतिनिधियों के खिलाफ गहन आक्रोश है। इस पर जलगृह विभाग के प्रभारी और वहां के अधिकारियों का रवैय्या भी बेहद चिंताजनक है। कई लोग तो खुलकर सवाल उठा रहे हैं कि क्या निगम का जलगृह विभाग स्थानीय विधायक की छवि खराब करने पर तुला है?
जानकारियों के मुताबिक, तकियापारा वार्ड २७ में चार दिन पहले अचानक ही नलों से गंदे पानी की आपूर्ति शुरू हुई थी। पानी से बदबू आने की वजह से वार्ड के नागरिक केन खरीदकर पेयजल की पूर्ति करने लगे। जो पानी आ रहा था, उसका उपयोग निस्तारी के लिए किया जाता रहा, किन्तु तीन दिन पहले नलों से पानी आना कम हुआ और फिर बंद हो गया। इसके चलते पेयजल के साथ ही निस्तारी की भी गम्भीर समस्या पैदा हो गई। रोजाना पानी के कई केन खरीदने की वजह से स्थानीय नागरिकों को आर्थिक चपत तो लगी ही। मजे की बात है कि इस वार्ड के पार्षद, महापौर परिषद के वरिष्ठ और जिम्मेदार सदस्य हैं। उनकी बातों को नगर निगम में कोई भी नजरअंदाज नहीं कर सकता। बावजूद इसके वार्ड पार्षद ने भी इतनी गम्भीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया। वार्ड के नागरिक ईद से दो दिन पहले जलापूर्ति बंद होने को लेकर कई तरह के सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ८ हजार से ज्यादा आबादी वाले वार्ड में पानी का महज एक टैंकर भिजवाकर नगर निगम अपने कत्र्तव्यों की इतिश्री नहीं कर सकता। एक नागरिक ने यहां तक कहा कि यदि नगर निगम में भाजपा की सत्ता होती तो यह आरोप लगाया जाता कि ईद से पहले जानबूझकर पानी की आपूर्ति नहीं की जा रही। इस नागरिक के मुताबिक, अब किसे जिम्मेदार ठहराएं?

बताया जाता है कि तकियापारा क्षेत्र के अशरफ नगर, मस्जिद गली, टेकरे साइड समेत चूना भट्ठी एरिया, मरकज एरिया व मोतीपारा क्षेत्र पेयजल से सर्वाधिक प्रभावित हैं। इन इलाकों में सँकरी गलियां हैं, जहां टैंकर नहीं पहुंच सकता। ऐसे में लोगों को गुंडी-बाल्टियां लेकर पानी भरने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के दिन वे त्यौहार मनाएं या पानी के लिए लाइन लगाएं। नागरिकों के मुताबिक, शनिवार को पानी के लिए त्राहि-त्राहि करते क्षेत्रवासियों के लिए महज एक टैंकर भिजवाया गया था। लोगों ने जब नाराजगी जाहिर की तो आज दो टैंकर और भिजवाए गए। नागरिकों के मुताबिक, इतनी बड़ी आबादी के लिए पानी के महज ३ टैंकर सर्वथा अपर्याप्त हैं। वार्ड के पार्षद को जब वस्तुस्थिति की जानकारी थी तो उन्हें त्यौहार से पहले ही व्यवस्था करवानी थी। आखिर पार्षद का और क्या काम है?
जिम्मेदारियों से कब तक पल्ला झाड़ेगा जलगृह विभाग
बताया जाता है कि सिर्फ तकियापारा वार्ड ही नहीं, पूरे शहर में पानी को लेकर बेहद चिंतनीय हालात हैं। तकियापारा से लगे पोलसायपारा वार्ड में विगत एक सप्ताह से गंदला पानी आ रहा है। इस पर भी यहां नल यदा-कदा ही खुलते हैं। पूर्व पार्षद नरेन्द्र चंदेल के मुताबिक, उन्होंने निगम के जिम्मेदार लोगों का ध्यान इस ओर कई बार आकृष्ट कराया, किन्तु किसी के सिर जूं नहीं रेंगी। कुछ ऐसा ही हाल पोलसायपारा क्षेत्र से लगे संतराबाड़ी इलाके का है। यहां भी नलों से कुछ मिनटों के लिए ही पानी आ रहा है। गयानगर क्षेत्र में भी एक सप्ताह से लोग पानी के लिए त्राहिमाम कर रहे हैं। पटरीपार क्षेत्र के अधिकांश इलाके भी इन हालातों से अछूते नहीं है।
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