कोल इंडिया चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल एस‌ईसीएल दौरे पर, कुसमुंडा वर्कशॉप कॉम्प्लेक्स, गेवरा रेल रैपिड लोड आउट सिस्टम एवं बरौद साइडिंग का किया उद्घाटन

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सीएमडी डॉ प्रेम सागर मिश्रा एवं निदेशक मण्डल रहे उपस्थित

दुर्ग न्यूज (बिलासपुर) 25 जून। एसईसीएल प्रवास पर आए कोल इंडिया चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल (भाप्रसे ) द्वारा आज कुसमुंडा क्षेत्र में वर्कशॉप कॉम्प्लेक्स, गेवरा क्षेत्र में एफ़एमसी (फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी ) के तहत बनाए गए रेल रैपिड लोड आउट सिस्टम (आरआरएलओएस) एवं वीसी के माध्यम से रायगढ़ क्षेत्र में बरौद साइडिंग का उदघाटन किया गया। इस अवसर पर एसईसीएल सीएमडी डॉ प्रेम सागर मिश्रा, निदेशक तकनीकी (संचालन) एसके पाल, निदेशक (वित्त) जी. श्रीनिवासन, निदेशक तकनीकी (यो./परियो.) एसएन कापरी, निदेशक (कार्मिक) देबाशीष आचार्या, महाप्रबंधक कुसमुंडा क्षेत्र संजय मिश्रा, महाप्रबंधक गेवरा क्षेत्र एसके मोहंती एवं महाप्रबंधक रायगढ़ क्षेत्र एचएस पांडे उपस्थित रहे। श्री अग्रवाल द्वारा उद्घाटित इन परियोजनाओं से एसईसीएल के इन क्षेत्रों में कोयला उत्पादन एवं प्रेषण में तेज़ी आएगी एवं ये कंपनी के कोयला उत्पादन के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।

कुसमुंडा ओपनकास्ट परियोजना की क्षमता 50 मिलियन टन प्रतिवर्ष है जिसके लिए एसईसीएल द्वारा 400 से अधिक एचईएमएम (हेवी अर्थ मूविंग मशीनरी) का क्रय किया जा रहा है जिसमें 60 टन से लेकर 240 टन क्षमता के कुल 261 डंपर शामिल हैं। इसे एवं एसईसीएल के मेगा प्रोजेक्ट्स से निकटता को ध्यान में रखते हुए, एचईएमएम मशीनों की मरम्मत और रखरखाव आवश्यकताओं के लिए एक मुख्य वर्कशॉप का निर्माण किया गया है। परियोजना में डंपर वाशिंग सिस्टम, बे लुब्रिकेशन सिस्टम, कम्प्रेस्ड एयर सिस्टम, ईओटी क्रेन, बिजली की आपूर्ति, इनडोर एवं आउटडोर लाइटिंग, संचार, वेंटिलेशन, अग्निशमन आदि जैसे सब-सिस्टम भी शामिल हैं।

2020 में शुरू हुई इस परियोजना की कुल लागत 248 करोड़ रुपए है और यह कुल 16 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली हुई है। इस वर्कशॉप में एचईएमएम मशीनरी हेतु विभिन्न सुविधाओं का प्रावधान किया गया है जैसे एक्सकेवेशन कॉम्प्लेक्स, ई एंड एम कॉम्प्लेक्स, स्टोर कॉम्प्लेक्स, सबस्टेशन, पंपहाउस, प्रशासनिक कार्यालय, कैंटीन, प्राथमिक उपचार केंद्र आदि।

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एफ़एमसी (फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी) के तहत बनाए गए गेवरा रैपिड लोडिंग सिस्टम (आरएलएस) परियोजना की कुल लागत 222 करोड़ रुपये है। इस रैपिड लोडिंग सिस्टम की मदद से हर वर्ष 20 मिलियन टन कोयला डिस्पैच करने में मदद मिलेगी। रैपिड लोडिंग सिस्टम में जहां 8 हॉपरयुक्त ट्रक रिसीविंग स्टेशन बनाया गया है वहीं इसके तहत बनाए गए बंकर की क्षमता लगभग 30,000 टन है। इस बंकर से प्रति घंटे 4,500 –5,500 टन कोयला रेल रैकों में लोड किया जा सकेगा। वहीं अगर बरौद साइडिंग की बात की जाए सायडिंग की क्षमता 20 हजार टन प्रतिदिन की होगी यानी यहाँ से प्रतिदिन लगभग 4 रैक कोयला भेजा जा सकेगा तथा यह बरौद-कोरीछापर सायडिंग के जरिए खरसिया मेन लाइन से जुड़ा है। इसके साथ ही एसईसीएल की महात्वाकांक्षी फस्र्ट माईल कनेक्टिविटी परियोजना के अंतर्गत बरौद में 10 मिलियन टन प्रतिवर्ष क्षमता के सीएचपी (कोल हैंडिलिंग प्लांट) का भी निर्माण हो रहा है जहाँ से लगभग 6 रैक कोयला प्रतिदिन डिस्पैच किया जा सकेगा। बरौद सायडिंग की शुरुआत माँड-रायगढ़ कोलफील्ड के विकास के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण रहने की आशा है। कोल इंडिया चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल की अध्यक्षता में एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर में समीक्षा बैठक हुई। जिसमें शीर्ष प्रबंधन सहित, विभिन्न विभागाध्यक्ष एवं क्षेत्रीय महाप्रबंधक उपस्थित रहे।

समीक्षा बैठक सह-सम्मान समारोह

दिन भर के कार्यक्रम के पश्चात देर संध्या एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर में समीक्षा बैठक-सह-सम्मान समारोह का आयोजन किया गया जिसमें एसईसीएल शीर्ष प्रबंधन के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के महाप्रबंधकों की उपस्थिति रही। बैठक में उत्पादन एवं उत्पादकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई तथा आवश्यक निर्देश दिए गए। इसके साथ ही भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं कोयला उद्योग में गौरवशाली 3 दशकों से अधिक के कार्यकाल के पश्चात प्रमोद अग्रवाल इसी महीने सेवानिवृत होना जा रहे हैं। इस अवसर पर एसईसीएल बिलासपुर में एसईसीएल सीएमडी डॉ प्रेम सागर मिश्रा द्वारा एसईसीएल निदेशक मण्डल एवं क्षेत्रीय महाप्रबंधकों की उपस्थिति में कोल इंडिया चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल को शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

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