ईद उल अजहा पर अमन के लिए दुआओं में उठे हाथ, तीन दिन तक चलने वाला कुर्बानी का सिलसिला शुरू

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दुर्ग न्यूज़, 17 जून। टि्वन सिटी में तीन दिन के ईद उल अजहा त्यौहार की शुरुआत सोमवार से हुई। कुर्बानी के जज्बे के साथ लोग ईद मना रहे हैं। 19 जून बुधवार तक हैसियत के मुताबिक मुस्लिम समुदाय के लोग बकरों की कुर्बानी करेंगे। पहले दिन ईदुलअजहा की नमाज शहर के तमाम ईदगाह व मस्जिदों में सुबह पढ़ाई गई। जिसमें बड़ी तादाद में लोग शामिल हुए। नमाज के बाद समाज के सभी समुदाय के लोगों ने मुस्लिम भाईयों को गले मिल कर मुबारकबाद दी। इसके साथ ही हज पूरा होने पर दुआएं की गईं।

जामा मस्जिद सेक्टर-6 के इमाम इकबाल अंजुम हैदर ने नमाज अदा करवाई। नमाज के बाद भिलाई नगर मस्जिद ट्रस्ट के सदर जमील अहमद की ओर से सालाना रिपोर्ट पेश की गई। जिसमें ट्रस्ट की ओर से मस्जिद में जारी निर्माण कार्य की जानकारी दी गई। वहीं मुल्क में बढ़ती सांप्रदायिक घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए ऐसे तत्वों पर लगाम लगाने की मांग की गई। इमाम के खुत्बे के बाद मुल्क में अमन व भाईचारे की दुआएं की गई।

ईद उल अजहा के मौके पर मक्का मुअज्जमा में हज पूरा होने पर सभी लोगों ने दुआएं की। खास तौर पर दुर्ग-भिलाई से गए हाजियों ने अपने-अपने परिवार में फोन-वीडियो कॉल कर हज पूरा होने की जानकारी दी और लोगों ने उनसे दुआओं की गुजारिश की। ईद की नमाज के मौके पर भिलाई में तमाम मस्जिदों व ईदगाहों में हज पूरा होने पर हाजियों को मुबारकबाद पेश की गई। ईद उल अजहा पर शहर के कब्रिस्तान हैदरगंज में लोग नमाज के बाद पहुंचे और अपने दिवंगत परिजनों की कब्र पर दुआएं की।

 

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शहर के प्रख्यात शिल्पकार हाजी एमएच सिद्दीकी की किताब ‘तामीर-ए-मस्जिद, मदरसा व मजारात’ का विमोचन ईद उल अजहा के मौके पर ईदगाह-मस्जिद शेर-ए-खुदा हाउसिंग बोर्ड में हुआ। हाजी सिद्दीकी ने यह किताब शिल्पकला के क्षेत्र में अपने 40 साल के तजुर्बे के आधार पर लिखी है। जिसमें उन्होंने मस्जिद, मदरसा और मजार के निर्माण के दौरान आर्किटेक्चर के विभिन्न पहलुओं पर रोशनी डाली है। जिससे ऐसे निर्माण भविष्य में भी मिसाल बनें। सभी ने हाजी सिद्दीकी की मेहनत को सराहा और किताब की मकबूलियत की लिए दुआएं की।

 

परहेजगारी पसंद करता है अल्लाह: हक

 

मरकजी मस्जिद पावर हाउस कैंप-2 में नमाज़ से पहले अपनी तकरीर में मौलाना इनामुल हक ने कहा कि अल्लाह ने कुर्बानी हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम से मांगी लेकिन ली नहीं। इब्राहिम अलैहिस्सलाम को जब बेटे पर छुरी चलाने की नौबत आई तो अल्लाह ने फ़रिश्ते के जरिए से एक दुंबा (भेड़) रखवा दिया और इस्माइल को हटा दिया। मौलाना हक ने कहा अल्लाह प्रेम और आत्मसंयम (तकवा-परहेजगारी) को पसंद करता है। इस कुर्बानी को क़यामत तक लोगों के लिए साहिबे हैसियत पर वाजिब कर दिया गया। इस के बाद नमाज़े ईदुल अजहा इमाम हाफिज कासिम ने अदा करवाई। इस मौके पर लोगों ने आपस में दिली मुबारकबाद दी और पुलिस विभाग के मौजूद लोगों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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