गोमर्डा अभयारण्य क्षेत्र के ग्रामीणों की 9 सूत्रीय मांग, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने करेंगे चक्काजाम | 9-point demand of the villagers of Gomarda Sanctuary area, will do Chakkajam on January 31st to get benefits of government schemes

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सारंगढ़-बिलाईगढ़9 मिनट पहले

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सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के गोमर्डा अभयारण्य के अंतर्गत आने वाले 28 गांव के लोग 9 सूत्रीय मांगों को लेकर भाजपा के नेतृत्व में 31 जनवरी को धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम करेंगे। इस विरोध-प्रदर्शन में 28 गांव के लोग शामिल होंगे।

कनकबीरा क्षेत्र के भाजपा महामंत्री रामकुमार थूरिया ने कहा कि किसान परिवार आर्थिक जरूरतों के समय अपनी जमीन का विक्रय करते हैं, लेकिन जिले के 28 गांवों में साल 1996 से क्रय-विक्रय का पंजीयन नहीं होने से दिक्कत आ रही है। इस वजह से उनकी अचल संपत्ति भी काम नहीं आ रही है, जिससे किसान परेशान हैं। इन 28 गांवों में लगभग 3200 परिवार रह रहे हैं। इन परिवारों को वन विभाग द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण का लाभ भी नहीं दिया जाता है। इससे अभयारण्य अंतर्गत आने वाले गांवों के लोग शासकीय योजनाओं से मिलने वाले लाभ से भी वंचित हो रहे हैं।

रामकुमार थूरिया ने कहा कि इसकी क्षतिपूर्ति राशि पहले 2000 रुपए दी जा रही थी, जो वर्ष 2018 से बंद है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पैसा नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने प्रत्येक परिवार को 10-10 हजार रुपए क्षतिपूर्ति राशि दिए जाने की मांग की है। गोमर्डा अभयारण्य के सभी 28 गांव घने जंगल से चारों तरफ से घिरे हुए हैं। बरसात के दिनों में वन्य जीवों का खतरा स्कूली बच्चों पर बना रहता है। जिसकी वजह से लड़कियां 5वीं-8वीं के बाद आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं। आवागमन की असुविधा एवं घने जंगलों की वजह से आगे की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने बेटियों को पढ़ाई की सुविधा मिले, इसके लिए पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास की स्थापना कनकबीरा में करने की मांग की है।

गोमर्डा अभयारण्य।

गोमर्डा अभयारण्य।

ग्राम कनकबीरा में वर्ष 2018 में अभयारण्य अंचल में नक्सल गतिविधि बढ़ने की वजह से पुलिस चौकी स्थापित की गई, जो अब तक सामुदायिक भवन पर ही संचालित की जा रही है। भूमि आवंटित नही होने से भवन निर्माण की प्रक्रिया अटकी हुई है। कनकबीरा गांव अभयारण्य क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां राजस्व की बड़े झाड़ मद की भूमि ही उपलब्ध है, इसलिए मद परिवर्तन कर पुलिस विभाग को भूमि आवंटित कर बजट देने की भी मांग की गई है।

स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की भी मांग

अभयारण्य क्षेत्र में एकमात्र प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कनकबीरा है, जहां लंबे समय बाद भी एमबीबीएस डॉक्टर की पदस्थापना नहीं की गई है। लोगों ने यहां स्वास्थ्य सुविधाएं और जनरल फिजिशियन यानि MBBS डॉक्टर की नियुक्ति की मांग की है। साथ ही पुलिस चौकी कनकबीरा में लड़ाई-झगड़े के मामले भी आते रहते हैं, जिनके मुलाहिजा के लिए भी अभी सारंगढ़ जाना पड़ता है।

जंगली जानवर करते हैं फसलों का नुकसान

गांववालों का आरोप है कि गोमर्डा अभयारण्य के किसानों की फसल प्रति वर्ष वन्य जीव बायसन, जंगली सुअर, नीलगाय, सांभर बर्बाद कर देते हैं। धान, दलहन व तिलहन की फसलों के बर्बाद होने पर भी आज तक वन विभाग ने एक किसान को भी मुआवजा लाभ नहीं दिलाया है। जबकि प्रत्येक गांव के किसान जंगली जानवरों से चराई कर दिए जाने से फसलों का नुकसान सहन कर रहे हैं। वहीं बंदर भी गांवों में काफी उत्पात मचा रहे हैं। लोगों की मांग है कि उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए।

गोमर्डा अभयारण्य के दमदरहा, टमटोरा, भांटाकोना बैरियर पर सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों में मेहमान के रूप में चारपहिया वाहनों से आने वाले लोगों से पर्यटन शुल्क लिया जाता है, जो गलत है। लोगों की मांग है कि 28 गांव के किसी भी परिवार में आने-जाने वाले मेहमान से शुल्क न लिया जाए। वहीं घने जंगल के बीच स्थित ग्राम खम्हारपाली में किसी भी कम्पनी का मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से स्थानीय लोगों को खाद्यान्न वितरण प्रणाली के तहत इपोस मशीन के माध्यम से चावल उठाव करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

साथ ही मोबाइल से वे कहीं संपर्क भी नहीं कर पाते। ग्राम अचानकपाली में भी मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचने से स्थानीय लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है, इसलिए दोनों गांवों के लोगों ने मोबाइल टावर लगाने की मांग की है।

गोमर्डा अभयारण्य के ग्राम पंचायत कनकबीरा के आश्रित ग्राम नरगीखोल के लिए आज तक पहुंच मार्ग सुगम नहीं है। यहां के लोगों को बरसात के 4 महीने तक नाला तैरकर आना-जाना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के साथ ही गंभीर बीमारियों की स्थिति में खाट के माध्यम से इलाज के लिए मुख्य सड़क तक लाया जाता है। इसलिए ग्रामीणों की सुविधा के लिए पुलिया निर्माण किया जाए।

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