रायपुर में राष्ट्रीय आम महोत्सव का शुभारंभ, आमों के महाकुंभ में 250 वेरायटी की प्रदर्शनी 

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रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय आम महोत्सव में देशभर की खुशबूदार और दुर्लभ आम किस्मों ने लोगों का मन मोह लिया। महोत्सव का उद्घाटन राज्यपाल रमेन डेका ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की।

इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि आम केवल एक फल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की पहचान है। उन्होंने किसानों से आधुनिक तकनीकों को अपनाकर आम उत्पादन और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने अपील की।

छत्तीसगढ़ में ‘मैंगो टूरिज्म’ की अपार संभावनाएं

राज्यपाल ने कहा कि बस्तर, कांकेर, कोण्डागांव और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में आम उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। महिला स्व-सहायता समूहों के लिए भी यह क्षेत्र रोजगार और उद्यमिता का बड़ा माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में “मैंगो टूरिज्म” को विकसित कर किसानों की आय में बड़ा इजाफा किया जा सकता है।

250 से ज्यादा किस्मों के आम बने आकर्षण

महोत्सव में 250 से अधिक किस्मों के आम प्रदर्शित किए गए। यहां बेर के आकार के छोटे आम से लेकर बीजापुर के प्रसिद्ध ‘हाथीझुल’ जैसे विशाल आम तक लोगों के आकर्षण का केंद्र बने।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आम को फलों का राजा कहा जाता है और भारतीय परंपरा में इसका विशेष महत्व है। आम की पत्तियों से शुभ अवसरों पर तोरण बनाए जाते हैं, वहीं इसकी लकड़ियों का उपयोग पूजा और हवन में किया जाता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप किसानों की आय दोगुनी करने के लिए राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है और आम की खेती इसमें अहम भूमिका निभा सकती है।

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जल संरक्षण और पर्यावरण पर जोर

राज्यपाल रमेन डेका ने अपने संबोधन में पर्यावरण संरक्षण और जल बचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को बढ़ावा देने और रेन वाटर हार्वेस्टिंग अपनाने अपील की।

महोत्सव के उद्घाटन के बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभिन्न किस्मों के आमों की जानकारी ली। इस दौरान किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और विश्वविद्यालय के प्राध्यापक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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