
दुर्ग न्यूज़, 6 जनवरी। सूखे नशे के खिलाफ छत्तीसगढ़ के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही दुर्ग पुलिस के द्वारा की गई है। अंतर्राज्यीय नशीली दवाईयो के सप्लाई चैन पर राजस्थान के कोटा, बुन्दी जयपुर में दुर्ग पुलिस द्वारा छापेमारी की कार्यवाही की गई और एक करोड़ 60 लाख 44 हजार से भी अधिक की नशीली टेबलेट एवं सिरप बरामद की गई है।


आपको बता दें कि पकड़े गए आरोपी अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में सप्लाई के लिए डार्क वेब के माध्यम से जुड़े थे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राम गोपाल गर्ग के द्वारा विशेष टीम गठित कर राजस्थान में यह कार्यवाही की गई है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रामगोपाल गर्ग ने आज पुलिस कंट्रोल रूम में बताया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सूखे नशे के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान के तहत एनडीपीएस के हर एक अपराध में पूरी चैन की गिरफ्तारी की मुहीम चलाई जा रही है, जिसके अंतर्गत दुर्ग जिले के थाना मोहन नगर में दर्ज अपराध नारकोटिक एक्ट में विवेचना एवं राजस्थान जाकर आरोपी की पतासाजी हेतु नगर पुलिस अधीक्षक दुर्ग मणिशंकर चन्द्रा के नेतृत्व में प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक सुश्री आकांक्षा पाण्डेय तथा निरीक्षक विजय यादव, थाना प्रभारी मोहन नगर, उपनिरीक्षक चेतन चन्द्राकर चौकी प्रभारी जेवरा सिरसा, प्रधान आरक्षक जावेद खान, आरक्षक कांती शर्मा, आरक्षक गौरसिंग राजपुत की विशेष टीम भेजी गयी थी। जिनके द्वारा राजस्थान के बुन्दी में बॉयोलैब रेमेडिस के संचालक अंकुश पालीवाल द्वारा पूरे देश के विभिन्न राज्यों में तथा अंतराष्ट्रीय मार्केट बांग्लादेश में ऑनलाईन माध्यम से फर्जी कम्पनियों को नशीली दवाईयाँ सप्लाई किया जाता था, जिसको गिरफ्तार किया गया। अंकुश पालीवाल द्वारा अवैध रूप से जमा किये गये प्रतिबंधित नशीली टेबलेट और सिरप जब्त किया गया। जिसका अवैध मार्केट में रेट 1 करोड़ 60 लाख 44 हजार रूपया है। सूखे नशे के खिलाफ छग के इतिहास में अब तक की यह सबसे बड़ी कार्यवाही दुर्ग पुलिस द्वारा की गयी है। इसी अपराध में दुर्ग जिला के वैभव खण्डेलवाल एवं आकांक्षा खण्डेलवाल द्वारा इण्डिया मार्ट के साईट में जाकर एक फर्जी कम्पनी वैभव फार्मसिटीकल बनाया गया था जिनके द्वारा राजस्थान के अंकुश पालीवाल से प्रतिबंधित नशीली दवाईयों मंगाकर ऑनलाईन कम्पनी इण्डिया मार्ट में वाइरस मेडिकोस के नाम से पूरे देश में अवैध रूप से नशीली दवाईयों सप्लाई किया जाता था। जबकि उसकी बहन आकांक्षा खण्डेलवाल के द्वारा छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में रिटेल मे बेचा जाता था। जिसे दुर्ग पुलिस द्वारा पूर्व में ही गिरफतार कर जेल भेजा जा चुका है। इसी सप्लाई में जब उनसे कड़ाई से पूछताछ की गई तो उनके द्वारा यह बताया गया कि डार्क वेब का उपयोग कर उनको पता चला कि किस प्रकार से फर्जी कम्पनी बनाकर अवैध रूप से नशीली दवाईयों का व्यापार कर पैसा कमाया जा सकता है। तब उनके द्वारा अंकुश पालीवाल से सम्पर्क कर अवैध रूप से प्रतिबंधित नशीली दवाईयों ऑनलाईन प्राप्त कर अवैध रूप से बिकी की जा रही थी। जिन्हें पूर्व में नारकोटिक एक्ट में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसी विवेचना में आरोपी वैभव खण्डेलवाल के मेमोरण्डम में राजस्थान के बूंदी जिले के बायो लेब रेमेडिस से इण्डिया मार्ट के माध्यम से फर्जी दस्तावेज के सहारे प्रतिबंधित नशीली दवाईयां को बेच रहा था। उक्त अपराध में अग्रिम विवेचना एवं धरपकड़ के लिये वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा तत्काल एक विशेष टीम गठित कर नगर पुलिस अधीक्षक दुर्ग मणि शंकर चंद्रा के नेतृत्व में राजस्थान बूंदी जिले रवाना किया गया। जहां पर बायोलेब रेमेडिस के संचालक अंकुश पालीवाल को विधिवत गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। जिसमें उनके द्वारा यह स्वीकार किया गया कि उसके द्वारा अवैध रूप से बने कंपनियों को प्रतिबंधित दवाईयों की सप्लाई की जा रही थी। साथ ही उनके द्वारा प्रतिबंधित दवाई जिनके निशानदेही पर दुर्ग पुलिस द्वारा राजस्थान के कोटा, बुन्दी और जयपुर में जाकर छोपेमारी की कार्यवाही की गई।
