कवर्धा6 घंटे पहले
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कवर्धा स्थित 100 बिस्तर जिला अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। हाल ही में, यहां पदस्थ मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. नीरज महादेव ने इस्तीफा दे दिया। इससे पहले भी कई डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं, तो कुछ ट्रांसफर पर दूसरी जगह पर चले गए हैं। इसके बावजूद अस्पताल के रिकॉर्ड में डॉक्टरों के पद भरे दिखाई देते हैं।
भास्कर ने पड़ताल की, अस्पताल के बाहर ओपीडी में लगे बोर्ड ने इसकी पोल खोल दी। ओपीडी के बाहर लगे बोर्ड में 23 विशेषज्ञ व डॉक्टर के नाम का उल्लेख है। लेकिन ज्यादातर डॉक्टर के नाम छिपा दिए गए हैं, क्योंकि वे सब नौकरी छोड़ चुके हैं। बोर्ड के मुताबिक 11 विशेषज्ञ व डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं। एक अन्य डॉक्टर ट्रांसफर के बाद पंडरिया चले गए हैं। वहीं एक डॉक्टर आगे की पढ़ाई के लिए लंबी छुट्टी पर हैं। फिर भी इनके नाम बोर्ड पर अंकित हैं। ओपीडी में भी जहां डॉक्टर के नाम का बोर्ड लगा है, उनमें कुछ इस्तीफा दे चुके हैं। बताया जा रहा है कि ज्यादातर डॉक्टर वेतन से असंतुष्ट हैं।
विशेषज्ञों के 11, तो एमओ के 6 पद लंबे समय से खाली
स्वास्थ्य विभाग की मानें, तो जिला अस्पताल में विशेषज्ञों के 18 पद स्वीकृत हैं। लेकिन मौजूदा समय में यहां विशेषज्ञों के 11 पद रिक्त हैं, जबकि सिर्फ 7 कार्यरत हैं। इसी तरह मेडिकल ऑफिसर (एमओ) के कुल 16 स्वीकृत पदों पर 10 सेवाएं दे रहे हैं। जबकि 6 पद लंबे समय से रिक्त हैं। इसे भरा नहीं जा रहा है। डॉक्टर के अभाव में मरीजों को परेशान रहना पड़ रहा है।
बगैर पैथोलॉजिस्ट के ब्लड बैंक, अब तक लाइसेंस ट्रांसफर नहीं
जिला अस्पताल में ब्लड बैंक बिना पैथोलॉजिस्ट के संचालित हो रहा है। पूर्व में यहां पैथोलॉजिस्ट के पद पर डॉ. एसआर चुरेन्द्र सेवाएं दे रहे हैं। उन्हीं के नाम पर लाइसेंस भी था। लेकिन प्रमोशन के बाद अब वे बेमेतरा जिला अस्पताल में बतौर सिविल सर्जन काम कर रहे हैं। उनके तबादले के बाद से यहां बगैर पैथोलॉजिस्ट के ब्लड बैंक चल रहा है। बता दें कि ब्लड बैंक में एचआईवी में एलीजा टेस्ट होता है। बाकी टेस्ट हेपेटाइटिस बी, सी और सिफलिस (वीडीआरएल), सिकलिन जांच होती है।
क्रॉस मैच और ब्लड ग्रुप ये सब जांच के बाद ब्लड जरूरतमंद मरीज को दिया जा सकता है। एलीजा टेस्ट बिना पैथोलॉजिस्ट के नहीं हो सकता है। वहीं अस्पताल के हमर लैब में बॉयो केमेस्ट्री और हार्मोनल टेस्ट जो पैथोलॉजिस्ट की उपस्थित में होना चाहिए, वह टेक्नीशियन के भरोसे हो रहा है। लैब जांच की बात करें, तो बीते साल 41300 जांच हुआ था, जो इस साल बढ़कर 51676 रक्त जांच की गई है।
जिस विशेषज्ञ के लिए भीड़ वह अब इस्तीफा दे चुके
जिला अस्पताल में एकमात्र मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. नीरज महादेव की पोस्टिंग हुई थी। ओपीडी में ज्यादातर मरीजों की भीड़ इन्हीं के पास रहती थी। लेकिन उक्त विशेषज्ञ ने अपना इस्तीफा दे दिया है। 20 जनवरी को आखिरी बार उन्होंने अपनी सेवाएं दी। नेत्र रोग विशेषज्ञ के न रहने से नेत्र सहायक ही आंख के मरीजों को देख रहे हैं। यहां मरीजों को इलाज व जांच के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
नए डॉक्टर की नियुक्ति की जा रही: सिविल सर्जन
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डाॅ. एमके सूर्यवंशी का कहना है कि डॉक्टरों की नियुक्त को लेकर प्रयास किया जा रहा है। अभी दो नए मेडिकल ऑफिसर की नियुक्ति हुई है। ब्लड बैंक का लाइसेंस पूर्व में डॉ. चुरेन्द्र के नाम पर था, उसे अन्य डॉक्टर के नाम पर ट्रांसफर कराया जा रहा है।
