कोरोनाकाल में छात्रों की स्मरण क्षमता में आई कमी; बीआईटी कॉलेज में कोविड-19 के बाद की स्थिति पर वक्ताओं ने रखी राय | There was a decrease in the memory capacity of the students during the Corona period; Speakers gave opinion on the situation after Kovid-19 in BIT College

Share this
  • Hindi News
  • Local
  • Chhattisgarh
  • Durg bhilai
  • There Was A Decrease In The Memory Capacity Of The Students During The Corona Period; Speakers Gave Opinion On The Situation After Kovid 19 In BIT College

भिलाई18 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

कोरोना संक्रमण के दो साल में अध्ययन और अध्यापन का कार्य बुरी तरह प्रभावित रहा। इसका सीधा असर छात्रों की स्मरण शक्ति और लेखन क्षमता पर पड़ा है। साथ ही प्राध्यापकों की भी क्षमता प्रभावित हुई है। प्रश्न पत्रों की सेटिंग और पाठ्यक्रमों में नवाचार को लेकर उनके विचारों में कमी आई है। यह बातें बीआईटी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में एडेप्टिव टीचिंग पैडागॉजी : पोस्ट कोविड सिचुएशन पर इन हाउस शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में सामने आई। करीब एक सप्ताह चले प्रशिक्षण में 41 प्रोफेसर शामिल हुए।

ऑनलाइन से ऑफलाइन मोड बदलने से चुनौतियां बढ़ीं

प्रशिक्षण में वक्ताओं की एक राय थी कि ऑनलाइन मोड से ऑफलाइन मोड में पढ़ाने का तरीका बदलने से छात्रों ने अपने दृष्टिकोण से कई नई चुनौतियों का सामना किया है। छात्र वर्तमान स्थिति से निपटने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। इसमें डॉ. अनुपमा हुद्दार, डॉ. संजय साहू, डॉ. सुरेखा भुसनूर, डॉ. एनके देवांगन, डॉ. आरएम पोद्दार एवं डॉ. निशांत यादव ने प्रशिक्षण देने के साथ शिविर को संबोधित भी किया।

डॉ. त्रिपाठी ने कहा- एक-दो साल बाद ही सही प्रभाव दिखेगा
समन्वयक डॉ. नागेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि यह समय जनित समस्या है। इसका समाधान समय से ही हो सकता है। एडेप्टिव टीचिंग पैडागॉजी को भी छात्रों के प्रदर्शन पर सकारात्मक प्रभाव दिखाने में एक या दो साल लगेंगे। डॉ. अनूप मिश्रा ने कहा कि अनुकूल शिक्षण शिक्षा शास्त्र समय की आवश्यकता है। भविष्य में केवल वही संस्थान बचेंगे जो इसको अपनाएंगे। 2 वर्षों में कोविड के कारण पूरे विश्व में एक बड़ा बदलाव देखा गया है। नई सामान्य स्थिति ने सभी को जरूरी बदलाव के लिए मजबूर किया है।

शुक्ला ने कहा- क्लास में बैठने की क्षमता व एकाग्रता में कमी
इलेक्ट्रिकल विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसपी शुक्ला ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को कोविड के बाद की स्थिति में शिक्षण प्रक्रिया में आवश्यक सुधार के लिए प्रशिक्षण देना था, ताकि कोविड स्थिति के दौरान छात्रों को हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। इन दिनों छात्रों की स्मरण और लेखन क्षमता में महत्वपूर्ण गिरावट आई है। एक और प्रमुख मुद्दा जिसका छात्र आज सामना कर रहे हैं और वह है बैठने की क्षमता और एकाग्रता की कमी। इस दिशा में भी काम करने की जरूरत है।

खबरें और भी हैं…

Share this
READ MORE  अबूझमाड़ में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, 4 नक्सलियों को मार गिराया