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- Commissioner Sanjay Alang Reached The Beautiful Tourist Destination ‘Desh Dekha’ Of Jashpur, Ate Dhutru Roti, Know The Method Of Making It
जशपुर5 घंटे पहले

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सरगुजा संभागायुक्त डॉ संजय अलंग ने शनिवार को जशपुर जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ‘देश देखा’ में सुविधाओं का जायजा लिया। इस मौके पर कलेक्टर डॉ रवि मित्तल और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। कमिश्नर डॉ अलंग ने स्वसहायता समूह द्वारा तैयार स्थानीय पकवान धूतरू रोटी का स्वाद भी चखा और महिलाओं से इसे बनाने की विधि भी जानी।

महिलाओं ने बताया कि कोहड़ा, उड़द दाल, चावल और राहर दाल के साथ धूतरू रोटी को बनाया जाता है और सरई पत्ता और रन पावर पत्ता के साथ लपेटकर इसे भाप में पकाया जाता है। वहीं कलेक्टर डॉ रवि मित्तल ने बताया कि पर्यटकों की सुविधा का ध्यान रखते हुए देश देखा में पानी, बिजली, सोलर एनर्जी और सड़क की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही कैंपिंग की भी सुविधा यहां आने वाले पर्यटकों को मिलेगी।

जशपुर संभागायुक्त डॉ संजय अलंग।
कलेक्टर ने बताया कि देश देखा पर्यटन के जरिए स्वसहायता समूह की महिलाओं को रोजगार से सीधे जोड़ा गया है। इनके जरिए बाहर से आने वाले पर्यटकों को नाश्ता और भोजन भी उपलब्ध कराया जाता है। जिला प्रशासन द्वारा पर्यटकों की सुविधा के लिए देश देखा में रहने के लिए कैम्प भी लगाया गया है। देश देखा में पर्यटकों के एक दिन रुकने पर 999 रुपए में शाम का नाश्ता, रात का खाना और सुबह के नाश्ते की सुविधा दी जाती है। उन्हें आसपास के वॉटर फॉल को भी घुमाया जाता है। कमिश्नर संजय अलंग भी देश देखा के सुंदर और मनोरम दृश्यों को देखकर आनंदित हो गए।

देश देखा प्राकृतिक सुंदरता से है भरपूर।
जशपुर से 12 किमी दूर पहाड़ की चोटी पर स्थित है देश देखा
जशपुर शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर मनोरम पर्यटन स्थल देश देखा है। ये नैसर्गिक खूबसूरती से परिपूर्ण है। यहां सूर्यास्त का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। करीब 1300 फीट की ऊंचाई से सूर्यास्त का नजारा देखना बहुत रोमांचक अनुभव है। यहां जिला प्रशासन ने सैलानियों के लिए सारा सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।
देश देखा पर्यटन स्थल की प्रमुख खासियत
जशपुर के भागलपुर रोड, बीटीआई होते हुए सारूडीह के रास्ते आटापाठ की घाटी पार कर देशदेखा तक पहुंचा जा सकता है। देश देखा पहाड़ की चोटी पर स्थित है, जहां से चरईडांड़, कुनकुरी, नारायणपुर का पूरा इलाका साफ नजर आता है। सूर्यास्त के वक्त ऐसा लगता है, मानों सूर्य को आप हाथ बढ़ाकर छू लेंगे। सूर्य आपके समानांतर ही अस्त हो रहा हो।
