नेपाल के पीएम ओली ने दिया इस्तीफा, दफ्तर में घुसे सैकड़ों प्रदर्शनकारी, काठमांडू से हवाई सेवा बंद

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काठमांडू। नेपाल में सोशल मीडिया बैन और सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरे Gen-Z प्रदर्शनकारियों के आगे सरकार झुक गई है। पहले नेपाल के गृह मंत्री, कृषि मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने इस्तीफा दिया और अब नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है।

आज शाम 6 बजे केपी शर्मा ओली की तरफ से सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी। ओली की तरफ से जारी लेटर में लिखा था, ‘मैं स्थिति का आकलन करने और एक सार्थक निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहा हूं। इसके लिए मैंने आज शाम 6 बजे एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है। मैं सभी भाइयों और बहनों से विनम्र निवेदन करता हूँ कि इस कठिन परिस्थिति में धैर्य बनाए रखें।’ लेकिन बैठक से पहले ही ओली ने इस्तीफे की घोषणा कर दी।

नेपाल में त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं। हवाई अड्डा प्राधिकरण ने असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है। टीआईए के महाप्रबंधक हंसराज पांडे ने बताया कि कोटेश्वर के पास धुएं के गुबार के बाद दोपहर 12:45 बजे से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रोक दी गई हैं। उन्होंने कहा, ‘हवाई अड्डा बंद नहीं है। हम इसे बंद भी नहीं करेंगे।’ चालक दल के सदस्य आवाजाही में समस्या के कारण हवाई अड्डे तक नहीं पहुंच पाए, जिससे उड़ान नहीं भर सकीं। बुद्ध एयर समेत घरेलू एयर लाइनों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सभी उड़ानें रद्द कर दी हैं।

सोमवार को शुरू हुआ था प्रदर्शन
सोशल मीडिया बैन करने के नेपाल सरकार के फैसले के विरोध में सोमवार को शुरू हुआ प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। मंगलवार को प्रदर्शन का स्तर व्यापक हो गया और युवाओं ने भ्रष्टाचार, आर्थिक असमानता और सरकारी कुप्रंबधन को आधार बनाकर केपी ओली का इस्तीफा मांगना शुरू कर दिया।

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दोपहर तक सैकड़ों प्रदर्शनकारी सरकार विरोधी नारे लगाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय में दाखिल हो गए। इसके तुरंत बाद ओली ने इस्तीफा दे दिया। इसके कुछ घंटे पहले प्रदर्शनकारियों ने मौतों की जवाबदेही की मांग करते हुए बालकोट स्थित उनके निजी आवास में आग लगा दी।

बता दें कि नेपाल में हुए हिंसक प्रदर्शनों में 20 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 200 से अधिक लोग घायल हैं। प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने कल रात सोशल मीडिया साइटों से प्रतिबंध वापस ले लिया था, लेकिन प्रदर्शकारी अभी भी डटे हुए हैं।

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