कुश्ती में कई अनियमितताएं मेरी शिकायत भी नहीं सुनी गई; नेशनल कोच कृपाशंकर बिश्नोई से चर्चा | Many irregularities in wrestling, my complaint was not even heard; Discussion with national coach Kripashankar Bishnoi

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रायपुर19 घंटे पहले

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रायपुर पहुंचे अर्जुन अवार्ड जीत चुके नेशनल कोच कृपाशंकर बिश्नोई ने कहा कि कुश्ती फेडरेशन में लंबे समय से अनियमितताएं चल रही हैं। - Dainik Bhaskar

रायपुर पहुंचे अर्जुन अवार्ड जीत चुके नेशनल कोच कृपाशंकर बिश्नोई ने कहा कि कुश्ती फेडरेशन में लंबे समय से अनियमितताएं चल रही हैं।

रायपुर पहुंचे अर्जुन अवार्ड जीत चुके नेशनल कोच कृपाशंकर बिश्नोई ने कहा कि कुश्ती फेडरेशन में लंबे समय से अनियमितताएं चल रही हैं। मैंने तो कई बार शिकायत की है, इस पर ध्यान नहीं दिया गया। नियमों को लेकर मैंने जो आपत्ति दर्ज की थी, उसके बाद तो मुझे ही हटा दिया गया। पढ़िए कृपाशंकर की भास्कर से बातचीत के अंश…

कुश्ती संघ के हालात पर क्या राय है, इसे आप किस रूप में देखते हैं?

ये जो चीजें चल रही है, वो काफी लंबे समय से चल रही हैं नियमों को सही तरीके से इम्प्लीमेंट नहीं किया जा रहा है। यहां नौसिखिए रेफरी को कॉम्पीटिशन में सीखने के लिए लगा देते हैं। इससे नेशनल लेवल पर कई गलत डिसीजन होते हैं। सीनियर लेवल के मंच पर नौसिखिए रेफरी कोच बनकर सिखाएंगे तो मेडल कहां से आएगा? मैंने तो कुछ दिन पहले ही ऐसे लोगों के नाम के साथ फेडरेशन को अवगत कराया था। बजरंग पुनिया के कोच सुजीत मान ने रेफरी पर आपत्ति की। इस आपत्ति पर उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। हालांकि उन्हें मैट पर चढ़ना नहीं था, लेकिन ऐसा तब होता है, जब पानी सिर के ऊपर पहुंच जाता है।

मतलब कुश्ती फेडरेशन में पूरी तरह से मनमानी चल रही है?
इसे मनमानी कह लो या अड़ियलपन। गलत चीजें हैं उसे भी सपोर्ट करना कह लो, मनमानी है। महिला कुश्ती टीम के साथ जो कोच लगा रहे हो, वो क्वालीफाइड तो हैं, अनुभवी नहीं हैं। चहेतों को कहीं भी या कहें दोहरा फायदा पहुंचाया जा रहा है, चोर दरवाजे से। ये कुरीतियां और विकार है।

इसमें खिलाड़ियों की क्या गलती है, उनका तो नुकसान ही हो रहा है?
खिलाड़ियों को तो लंबा चौड़ा नुकसान हो चुका है। क्योंकि फेडरेशन के सहायक सचिव विनोद तोमर देखकर तय करते हैं कि आपकी उम्र क्या है? वे जन्म प्रमाण पत्र को नहीं मानते। तीन चार साल पहले ही जन्म प्रमाण पत्र का नियम लागू हुआ है। शेष|पेज 9

अब कोई खिलाड़ी इसे बनवाकर लाता है तो इसे गलत माना जाता है। उन्हें कहा जाता है तुम तो सीनियर हो जूनियर नहीं। उनके इसी रवैये से कई खिलाड़ियों ने लाचार होकर एफीडेविड दे दिया कि हां हमसे गलती हुई और हमारी उम्र ज्यादा है। ऐसा इसलिए क्योंकि वहां तोमर बाबा बैठे हैं, जो चेहरा देखकर बता देते हैं कि फलाने खिलाड़ी की क्या उम्र होगी? इसका भी मैंने विरोध किया था।

वर्तमान में खिलाड़ियों का जो गुस्सा फूटा है, उसे रोकने के लिए किस तरह से प्रयास करने चाहिए?
इसे रोकने के लिए बहुत सारे सुझाव भारतीय कुश्ती संघ को दिए हैं, लेकिन वो मानने को तैयार नहीं है। मैंने सुझाव दिया कि रेफरी की ड्यूटी कॉम्पीटिशन के लेवल और अनुभव के हिसाब से लगानी चाहिए। सप्लीमेंट का सुझाव दिया, जो नहीं मानी गई, खिलाड़ियों को बाहर ट्रेनिंग के लिए जाना हो तो भारतीय कुश्ती संघ एक चिट्‌ठी की मदद भी नहीं करता।

क्या खेल संघों में राजनीतिक व्यक्तियों का होना नुकसानदेह है?
ऐसा नहीं है। खेल संघों में पॉलिटिशियन, उद्योगपतियों का होना भी बहुत जरूरी है। क्योंकि खेल संघों के संचालन में इनकी जरूरत होती है। भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष सांसद बृजभूषण शरण ने बहुत अच्छी नियत से काम शुरू किया। उन्होंने कुश्ती को फर्श से अर्श तक पहुंचाया। लेकिन उनके आसपास के लोग अपने अनुसार से नियम बनाते गए और नेताजी उसे मानते गए। वे बुरे आदमी नहीं हैं, उन्होंने कुश्ती के लिए काफी काम किया है। एक सांसद होने के बावजूद वे किसी भी चैंपियनशिप में आ जाते हैं और फाइनल होने तक रूकते हैं। ऐसी दीवानगी और समर्पण किसी नेता में नहीं हो सकती।

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