
दंतेवाड़ा। बस्तर संभाग में नक्सलवाद तेजी से कमजोर पड़ता जा रहा है। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा जिले में रविवार को 37 नक्सलियों ने पुलिस अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण किया, जिसे सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता मानी जा रही है। लोन वर्राटू अभियान—जो कि बस्तर पुलिस द्वारा चलाया जा रहा एक जनसमर्पण अभियान है—इसके तहत ये सभी नक्सली मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार हुए।

पिछले कई वर्षों से नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में लगातार पुलिस व सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई के बाद नक्सलियों का नेटवर्क कमजोर पड़ा है। विशेष रूप से टॉप लीडर्स हिड़मा, बसवराजू समेत कई बड़े कमांडरों के मारे जाने के बाद नक्सली संगठन बुरी तरह टूट चुका है। पिछले डेढ़ साल में सुरक्षा बलों ने 13 से अधिक टॉप नक्सली लीडरों को मार गिराया है, जिससे नक्सलियों का मनोबल गिरा है।
सूत्रों के अनुसार, हिड़मा की मौत के बाद बस्तर में नक्सल संगठन की व्यवस्था चरमरा गई है। उनके प्रमुख सहयोगी भूपति, रूपेश और अब चैतू जैसे लीडरों के सरेंडर करने के बाद बचे हुए नक्सली लगातार दहशत में हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई क़द्दावर नक्सली कैडर ने भी आत्मसमर्पण कर दिया है।

वर्तमान में बड़े नक्सली लीडरों में केवल कुछ ही नाम बचे हैं—देवजी, गणपति, मिशिर बेसरा, पापा राव, गणेश उइके और बारसे देवा—जिनकी संख्या कुल मिलाकर 8–9 के लगभग मानी जा रही है। सुरक्षा बलों का कहना है कि जिस तेजी से नक्सली सरेंडर कर रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि बस्तर में नक्सलवाद समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।
आत्मसमर्पण करने वाले सभी 37 नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास योजना के तहत विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। SP ने बताया कि ये सभी अब हिंसा का रास्ता छोड़कर शांतिपूर्ण जीवन जीने की इच्छा रखते हैं और प्रशासन उन्हें हर संभव सहायता देगा।
बस्तर के लोगों ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि वर्षों से हिंसा झेल रहे इलाकों में अब शांति की उम्मीद और भी मजबूत हो गई है। सरकार और पुलिस प्रशासन का दावा है कि आने वाले समय में नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य अब ज्यादा दूर नहीं है।
