राकांपा (अजित पवार) की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी पर बवाल, कई दिग्गज बाहर, परिवारवाद पर उठे सवाल

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मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की नवघोषित राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज कर दी है। नई सूची जारी होने के बाद वरिष्ठ नेताओं, पुराने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष और नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।

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नई कार्यकारिणी में कई ऐसे वरिष्ठ नेताओं को जगह नहीं मिली है, जिन्होंने वर्षों तक संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। बाहर किए गए प्रमुख नेताओं में प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ और दिलीप वलसे पाटिल जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद प्रफुल पटेल को कार्यकारिणी से बाहर किए जाने को लेकर हो रही है। पार्टी विभाजन के दौरान अजित पवार के सबसे करीबी सहयोगियों में रहे प्रफुल पटेल लंबे समय से राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे थे। ऐसे में उनका नाम सूची से गायब होना कई राजनीतिक सवाल खड़े कर रहा है।

इसी तरह पार्टी के एकमात्र लोकसभा सांसद सुनील तटकरे को भी राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन और संसदीय अनुभव के बावजूद उन्हें नई टीम में अहम जिम्मेदारी न मिलना बड़ा संकेत माना जा रहा है।

नई सूची के बाद पार्टी के भीतर परिवारवाद को लेकर भी बहस तेज हो गई है। सुनेत्रा अजित पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि पार्थ अजित पवार और जय अजित पवार को क्रमशः राष्ट्रीय महासचिव और राष्ट्रीय सचिव जैसे अहम पद सौंपे गए हैं। इससे संगठन में शक्ति के केंद्रीकरण को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
वहीं, कई राज्यों में संगठन खड़ा करने वाले पुराने नेताओं को बाहर कर अपेक्षाकृत कम चर्चित चेहरों को जिम्मेदारी दिए जाने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा पार्टी के भीतर बड़ा विवाद खड़ा कर सकता है।

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