
– कमीशनखोर और भ्रष्ट नेताओं का खामियाजा भोग रही दुर्ग की जनता

नरेश सोनी
दुर्ग। शहर में अमृत मिशन योजना बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई है, लेकिन १५० करोड़ की इतनी बड़ी और महती योजना की असफलता ने भी नगर निगम के भ्रष्ट अफसरों और कमीशनखोर नेताओं की आंखें नहीं खोली। इसी का नतीजा है कि दुर्ग के नागरिकों के लिए पेयजल की सुलभ व्यवस्था एक दु:स्वप्न साबित हो रही है और आने वाले कई दशकों तक लोग इसका खामियाजा भोगेंगे। वास्तव में नगर निगम की वर्तमान परिषद और महापौर धीरज बाकलीवाल के कार्यकाल में अमृत मिशन योजना की असफलता एक बदनुमा दा$ग लगा गई है, जिसकी भरपाई अब संभव नहीं है। इस पूरी योजना की असफलता के लिए महाराष्ट्र की वह एजेंसी भी बराबर की जिम्मेदार है, जिसके अफसरों ने मानिटरिंग करने की बजाए अपने-अपने हिस्से लेकर दफ्तरों में बैठना मुनासिब समझा।

ऊपर फोटो को देखकर कोई सामान्य व्यक्ति भी सहज ही अंदाजा लगा सकता है कि आखिर दुर्ग शहर में अमृत मिशन योजना फ्लॉप क्यों हुई। यह एक छोटा-सा, किन्तु सटीक उदाहरण है। दरअसल, संतराबाड़ी-सिंधी कालोनी क्षेत्र में पुलिया का निर्माण किया जा रहा है। संतराबाड़ी के क्षेत्र से सिंधी कालोनी के क्षेत्र के बीच में ही उक्त पुलिया है। दोनों ओर पानी की पाइप लाइन बिछा दी गई है, लेकिन पुलिया बीच में होने की वजह से यहां का काम रूक गया था। अब पुलिया के ऊपर से पाइप लाइन बिछाई जा रही है। मजे की बात है कि भूमि तल से पुलिया के ऊपर बिछाई गई पाइप की ऊंचाई करीब २ फीट है। जब इन क्षेत्रों में २ फीट नीचे ही पानी नहीं आ रहा है तो २ गुणा २ यानी ४ फीट ऊपर पानी कैसे चढ़ेगा, यह अपने आपमें बड़ा सवाल है। अमृत मिशन के तहत पूरे शहर में इसी तरह के अजीबोगरीब काम किए गए हैं। ठेकेदारों ने बड़े पैमाने पर काम हासिल किया और फिर पेटी कांट्रेक्टरों और नौसिखिए ठेकेदारों को काम बांट दिया। जिनकी सत्ता थी, उनके लोग अचानक ठेकेदार बन बैठे और फिर शहर का बर्बाद करने का खेल शुरू कर दिया गया।
वर्तमान में पूरा शहर पानी की गम्भीर समस्या से जूझ रहा है और इसकी सबसे बड़ी वजह इसी तरह के ऊंट-पटांग तरीके से बिछाई गई पाइप लाइन है। नौसिखिए ठेकेदारों ने अपनी अनुभवहीनता की वजह से गड्ढे खोदे और पाइप लाइन बिछा दी, लेकिन यह जमीन के भीतर कहीं ऊंची तो कहीं नीची है। यही वजह है कि सभी इलाकों में समान तरीके से जलापूर्ति नहीं हो पाती। हालांकि इसकी एक प्रमुख वजह योजना के तहत बनाई गई टंकियों में पानी नहीं भरना भी है। लेकिन समस्या बस इतनी ही नहीं है। मनमाने तरीके से काम करने की वजह से लोगों को पानी नहीं मिलना एक बात है, लेकिन शहर के लिए अब यह स्थाई समस्या बनने जा रही है। जाहिर है कि लोगों को पानी के लिए आने वाले कई दशकों को इसलिए भी तरसना पड़ेगा, क्योंकि अव्यवस्थित और बेतरतीब पाइप लाइनों को फिर से खोदकर बिछाया जाना अब संभव नहीं है। इस पर ठेकेदारों की लापरवाही का एक नमूना शुरूआती बरसात में ही देखने को मिल रहा है। पाइप लाइन बिछा देने के बाद उस पर मिट्टी बिछा दी गई। कहीं-कहीं रेत ज्यादा और सीमेंट कम की मात्रा में लीपापोती की गई। फिलहाल स्थिति यह है कि पूरे शहर में पाइप लाइन वाली जगहों में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। लोगों को कनेक्शन देने के लिए भी सड़कों को आर-पार काटा गया। इन गड्ढों में पानी भर गया है। रोजाना शहर में दर्जनों हादसे इन गड्ढों की वजह से हो रहे हैं।
शर्मनाक बात तो यह भी है कि इतनी लम्बी जद्दोजहद और घटियापंथी के बाद भी जलगृह विभाग में यह बताने वाला कोई नहीं है कि अमृत मिशन के अधूरे काम कब पूरे होंगे? जबकि अब भी ४४३ किलोमीटर क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाना बाकी है। दो दर्जन से ज्यादा वार्डों में नल के कनेक्शन भी नहीं जोड़े गए हैं। पूर्व कमिश्नर हरेश मंडावी ने इन हालातों को गम्भीरता से लिया था, किन्तु भ्रष्ट और निकम्मी व्यवस्था के चलते वे भी बहुत ज्यादा कुछ कर नहीं पाए। अब नए कमिश्नर प्रकाश सर्वे से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे निगम को पटरी में लाएंगे, लेकिन पदभार ग्रहण करने के बाद जिस तरह से वे महापौर और विधायक के यहां हाजिरी लगाने पहुंचे, उसके बाद उनसे भी ज्यादा उम्मीदें रखना बेमानी होगा।
