एक क्लिक की चूक से बचने सीखा सबक, अधिकारों को जाना छात्राओं ने 

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० DLSA दुर्ग के विधिक जागरूकता शिविर में साइबर फ्रॉड, डिजिटल सुरक्षा, e-FIR, निःशुल्क विधिक सहायता और शिक्षा के अधिकार पर विशेष मार्गदर्शन

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दुर्ग। डिजिटल युग में मोबाइल फोन और इंटरनेट ने शिक्षा, बैंकिंग, खरीदारी और संचार को आसान बनाया है, लेकिन इसी डिजिटल सुविधा के साथ साइबर अपराध का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। एक अनजान लिंक, फर्जी कॉल, OTP साझा करने की एक छोटी-सी चूक या ऑनलाइन भुगतान में थोड़ी-सी असावधानी किसी व्यक्ति को आर्थिक और मानसिक परेशानी में डाल सकती है। ऐसे समय में डिजिटल सतर्कता के साथ कानूनी जागरूकता भी नागरिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।

इसी सोच के साथ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के अध्यक्ष के विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा शासकीय पोस्ट मैट्रिक स्नातकोत्तर अनुसूचित जनजाति कन्या छात्रावास, आदिम जाति विकास विभाग, दुर्ग में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर का विशेष फोकस छात्राओं को साइबर अपराध से बचाव, डिजिटल सुरक्षा, e-FIR, निःशुल्क विधिक सहायता तथा अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने पर रहा।

कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग के श्री रवि कुमार महोबिया, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी तथा वीरेंद्र सिंह, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी उपस्थित रहे। इस अवसर पर चौकी स्मृतिनगर एवं थाना सुपेला के पुलिस स्टाॅफ ने भी सहभागिता की।

 

साइबर अपराध से बचाव सिर्फ सावधानी नहीं, कानूनी जागरुकता भी जरूरी

 

शिविर में छात्राओं को साइबर अपराध के बदलते स्वरूपों के बारे में जागरूक करते हुए बताया गया कि साइबर अपराधी अक्सर विश्वास, भय और जल्दबाजी का फायदा उठाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। छात्राओं को फर्जी कॉल, OTP फ्रॉड, बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी लिंक, ऑनलाइन शॉपिंग से संबंधित धोखाधड़ी तथा डिजिटल माध्यमों से होने वाली अन्य ठगी के संबंध में सावधान किया गया।

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न्यायाधीशगण ने छात्राओं को विशेष रूप से समझाया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, ATM PIN, CVV, पासवर्ड, बैंक खाते की जानकारी अथवा अन्य संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, अनजान एप्लीकेशन डाउनलोड करने तथा अविश्वसनीय वेबसाइट पर व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी दर्ज करने से भी बचना चाहिए।

छात्राओं को यह भी बताया गया कि यदि कोई व्यक्ति फोन पर स्वयं को बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, कूरियर एजेंट अथवा किसी प्रतिष्ठित संस्था का प्रतिनिधि बताकर तत्काल पैसे भेजने या गोपनीय जानकारी साझा करने का दबाव बनाए, तो घबराने के बजाय कॉल की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए।

 

साइबर अपराध होने पर चुप न रहें

 

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि साइबर अपराध की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को शर्म, भय या संकोच के कारण चुप नहीं रहना चाहिए। समय पर शिकायत और उचित कानूनी कदम आर्थिक नुकसान को सीमित करने तथा अपराध की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। छात्राओं को साइबर अपराध से संबंधित शिकायत के लिए उपलब्ध शिकायत तंत्र की जानकारी दी गई और उन्हें यह संदेश दिया गया कि डिजिटल अपराध के खिलाफ सबसे पहला हथियार जागरुकता है और दूसरा समय पर कार्रवाई।

e-FIR और निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी

शिविर में छात्राओं को e-FIR की सुविधा एवं अपराध की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने के संबंध में जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि कानून पीड़ित व्यक्ति को शिकायत और न्याय प्राप्त करने के लिए विभिन्न माध्यम उपलब्ध कराता है तथा आवश्यकता होने पर उचित विधिक मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।

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इसके साथ ही निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था के संबंध में जानकारी देते हुए NALSA हेल्पलाइन नंबर 15100 से अवगत कराया गया। छात्राओं को बताया गया कि पात्र व्यक्तियों को विधिक सेवा संस्थाओं के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है।

शिक्षा का अधिकार सशक्त भविष्य की आधारशिला

साइबर सुरक्षा के साथ कार्यक्रम में NALSA SHIKSHA SCHEME, 2026 तथा Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009 की धारा 12(1)(c) पर भी विशेष चर्चा की गई। न्यायाधीशगण ने छात्राओं को संबंधित योजना एवं कानूनी प्रावधानों के उद्देश्य और महत्व के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि शिक्षा तक समान और प्रभावी पहुँच बच्चों के समग्र विकास तथा सशक्त समाज के निर्माण की आधारशिला है।

इस अवसर पर छात्राओं को यह संदेश भी दिया गया कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने अधिकारों को समझने, सही निर्णय लेने और आत्मनिर्भर बनने की शक्ति है।

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