बैगा बच्चों की मौत पर दीपक बैज का सरकार पर हमला, बोले- आदिवासी मुख्यमंत्री के राज में कुपोषण से मर रहे बच्चे

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में बैगा जनजाति के बच्चों की मौत और किसानों को धान की कीमत के मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कवर्धा जिले के वनांचल क्षेत्र में कुपोषण और एनीमिया के कारण बैगा समुदाय के पांच बच्चों की मौत हुई है, जबकि कई बच्चे अब भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। बैज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार पर आदिवासी क्षेत्रों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए मृत बच्चों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है।

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बैगा जनजाति के 5 बच्चों की मौत, 13 अस्पताल में भर्ती; सरकार पर बरसे दीपक बैज

दीपक बैज ने पत्रकार वार्ता में बताया कि वे आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया, प्रदेश अध्यक्ष जनक ध्रुव और अन्य स्थानीय नेताओं के साथ कवर्धा जिले के रेंगाखार वनांचल क्षेत्र स्थित नंदनी कुमान गांव और बोडला उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। उनके अनुसार, गांव में कुपोषण और एनीमिया से प्रभावित 13 बच्चे स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती हैं, जबकि 10 से अधिक बच्चे अब भी गांव में ही हैं और इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंचे हैं।

बैज ने दावा किया कि स्थानीय लोगों से बातचीत में पूरे क्षेत्र में कुपोषण, एनीमिया, डायरिया और मलेरिया की समस्या सामने आई है। उन्होंने कहा कि नंदनी कुमान और आसपास के गांवों में आज भी स्वच्छ पेयजल की समस्या है।

पिछले साल भी हुई थीं मौतें, स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठाए सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पिछले साल भी इसी इलाके में मलेरिया और डायरिया से बैगा जनजाति के लोगों की मौत हुई थी। इसके बावजूद सरकार ने मलेरिया और डायरिया से बचाव के लिए प्रभावी अभियान नहीं चलाया और न ही मेडिकेटेड मच्छरदानियां बांटी गईं।

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उन्होंने टीकाकरण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्षेत्र में बच्चों का टीकाकरण सही ढंग से नहीं हुआ है और कुछ बच्चे खसरे से भी पीड़ित हैं। बैज ने कहा कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी या मंत्री के मौके पर नहीं पहुंचने की बात सामने आई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का सुपोषण अभियान कागजों और विज्ञापनों तक सीमित रह गया है। बैज ने कहा कि बैगा समुदाय संरक्षित जनजाति की श्रेणी में आता है और इसके लिए विशेष योजनाएं होने के बावजूद बच्चों की मौत होना गंभीर चिंता का विषय है।

मृत बच्चों के परिजनों को 10 लाख मुआवजा देने की मांग
दीपक बैज ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को इस स्थिति पर आत्मचिंतन करना चाहिए कि आदिवासी समाज को सरकारी योजनाओं का कितना लाभ मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कुपोषण, मलेरिया और डायरिया से निपटने के लिए अभियान चलाए गए थे, लेकिन मौजूदा सरकार के शासन में फिर ऐसी स्थिति बन गई है।

कांग्रेस ने मांग की है कि कुपोषण से जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही, गांव में रह रहे कुपोषित बच्चों के इलाज और देखभाल के लिए कुपोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) खोला जाए।

धान खरीदी पर भी सरकार को घेरा, 3358 रुपये प्रति क्विंटल भुगतान की मांग

पत्रकार वार्ता के दौरान दीपक बैज ने धान खरीदी और किसानों को मिलने वाली आदान सहायता के मुद्दे पर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि साय मंत्रिमंडल ने किसानों को इस वर्ष धान खरीदी के दौरान मिलने वाली आदान सहायता की गणना प्रति एकड़ के आधार पर करने का फैसला लिया है, जबकि भाजपा ने चुनाव के दौरान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदने का वादा किया था।

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बैज ने आरोप लगाया कि प्रति एकड़ आदान सहायता की घोषणा के जरिए किसानों को भ्रमित किया जा रहा है। उनके मुताबिक, किसान जितना धान बेचेगा, उसी के अनुपात में अंतर की राशि मिलेगी और रकबा समर्पण तथा गिरदावरी के आधार पर कटौती की आशंका भी बनी रहेगी।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब भाजपा ने प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान का वादा किया था, तो अब व्यवस्था को प्रति एकड़ के आधार पर क्यों बदला जा रहा है।

एमएसपी में बढ़ोतरी किसानों का हक: बैज

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल के वादे के साथ पिछले तीन वर्षों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में हुई 258 रुपये की बढ़ोतरी जोड़कर कुल 3358 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जाए।

बैज ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी केंद्र की ओर से एमएसपी बढ़ने पर राज्य सरकार ने किसानों को मिलने वाली कुल राशि में बढ़ोतरी की थी। उन्होंने वर्षवार आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि धान का एमएसपी बढ़ने के साथ राज्य सरकार की आदान सहायता घटती गई है।

उनके अनुसार, वर्ष 2023-24 में एमएसपी 2183 रुपये प्रति क्विंटल और आदान सहायता 917 रुपये प्रति क्विंटल थी। वर्ष 2024-25 में एमएसपी 2300 रुपये होने पर आदान सहायता 800 रुपये, जबकि वर्ष 2025-26 में एमएसपी 2369 रुपये होने पर सहायता 731 रुपये प्रति क्विंटल रह गई। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2026-27 में एमएसपी 2441 रुपये होने के बाद आदान सहायता घटकर 659 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है।

बैज ने कहा कि उनके हिसाब से तीन वर्षों में आदान सहायता में 258 रुपये प्रति क्विंटल की कमी हुई है। 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से यह अंतर 5418 रुपये प्रति एकड़ बैठता है। उन्होंने इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार से जवाब मांगा।

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कांग्रेस की प्रमुख मांगें
किसानों को 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से एकमुश्त भुगतान किया जाए।
सभी ग्राम पंचायतों में नकद भुगतान केंद्र खोले जाएं, ताकि धान बेचने के तुरंत बाद किसानों को राशि मिल सके।
पंजीकृत किसानों से पूरे पात्र रकबे के हिसाब से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदा जाए।
जबरन रकबा समर्पण और फर्जी गिरदावरी के आधार पर खरीदी की सीमा कम करने पर रोक लगे।
दीपावली से पहले पंजीकृत किसानों को अग्रिम भुगतान किया जाए।
कांग्रेस के अनुसार, पिछली बकाया राशि और एमएसपी वृद्धि से संबंधित कुल 6066 करोड़ रुपये का भुगतान दीपावली से पहले किया जाए।

1 नवंबर को दिल्ली में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली

दीपक बैज ने बताया कि 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की ओर से ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता इसमें शामिल होंगे।

बैज के मुताबिक, प्रदेश के विभिन्न जिलों से कांग्रेस कार्यकर्ता ट्रेन, बस, हवाई मार्ग और निजी वाहनों से दिल्ली रवाना होंगे। उन्होंने दावा किया कि देशभर से 10 लाख से अधिक लोग रैली में शामिल होंगे।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को निरस्त करने और काटे गए मतों की बहाली की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि इन मांगों को लेकर कांग्रेस का आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।

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