नहीं रहे मजदूर नेता कामरेड पीके मोइत्रा

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भिलाईनगर। छत्तीसगढ़ अंचल के जाने माने, जुझारु ट्रेड यूनियन व कम्युनिस्ट नेता पीके मोइत्रा का बीती रात कोलकाता में निधन हो गया। वे छात्र जीवन से ही मार्क्सवादी विचारधारा के प्रति आकर्षित होकर कम्युनिस्ट आंदोलन में शामिल हो गए। वे लंबे समय तक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के अविभाजित मध्यप्रदेश के राज्य सचिव मंडल के सदस्य रहे। वे सन 1984 में दुर्ग लोकसभा एवं 1985 में भिलाई नगर विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रत्याशी थे। वे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी से महज 1200 वोटों से पराजित हुए थे। वे हिन्दुस्तान स्टील एम्प्लॉइज़ यूनियन, भिलाई (सीटू) के पूर्व महासचिव तथा मध्य प्रदेश सीटू के पूर्व उपाध्यक्ष थे। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी उनके निधन पर गहरा शोक प्रकट करती है। पार्टी में मजदूर वर्ग के आंदोलन एवं ट्रेड यूनियन आंदोलन को दिए उनके अमूल्य योगदान को सदा याद किया जायेगा। भिलाई में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को जनता के बीच स्थापित करने में उनका महत्वपूर्ण भूमिका रही।
भिलाई औद्योगिक क्षेत्र में मालिकों द्वारा मजदूरों के शोषण के खिलाफ उन्हें संगठित कर लंबा संघर्ष किए। मजदूरों के आंदोलन के दौरान उन्हे गिरफ्तार कर लगभग एक वर्ष तक जेल में बंदी बनाकर रखा गया। उन्होंने भिलाई क्षेत्र सहित पूरे अविभाजित मध्य प्रदेश के मजदूर आंदोलन को एक नई दिशा व पहचान दी थी। वे पार्टी व ट्रेड
यूनियन के नेतृत्वकारी भूमिका से हटने के बाद भी मजदूर संगठनों को निशुल्क विधिक सलाह व मार्गदर्शन देते रहे। कॉ. मोइत्रा का निधन पार्टी् व मजदूर आंदोलन के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
पार्टी उनके शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करती है।

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