भिलाईनगर, 27 मार्च। केन्द्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आगामी 5 अप्रैल को देशभर के लाखों मजदूर-किसान व खेतमजदूर संसद का घेराव करेंगे। उक्ताशय की जानकारी राजमिस्त्री मजदूर रेजा कुली एकता यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष सुखरंजन नंदी ने दी।
उन्होंने केन्द्र की भाजपा सरकार पर मजदूर विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां आज देश में आर्थिक संकट के कारण बेरोजगारी दर ज्यादा है ऐसी स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा में 100 दिन ग्रामीण लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का गारंटी प्रदान करता है। वहीं केन्द्र की भाजपा सरकार ने इस वर्ष के बजट में मनरेगा के आबंटन में भारी कटौती कर ग्रामीण जनता के रोजगार के अधिकार से वंचित कर दिया है।
उन्होने सरकार की तीखी आलोचना करते हुये कहा कि सरकार ने जो राशि इस मद में आबंटन किया है। उस राशि में महज प्रति मजदूर को वर्ष में 25 दिन से अधिक का रोजगार नहीं मिल सकता है। सरकार पूरी तरह से मनरेगा को समाप्त कर देना चाहती है। ताकि कार्पोरेट घरानों, ठेकेदार और मालिकों के पास सस्ते दरों मे श्रमिक अपने श्रम को बेचने को विवश हो जाए।
जबकि देश की बढ़ती बेरोजगारी से निपटने में मनरेगा एक कारगर उपाय है और सरकार को ग्रामीण मजदूरों को साल में 200 दिन काम देने लायक राशि आबंटित करना चाहिए।
मजदूर नेता ने कहा कि देश में महंगाई के मद्देनजर मनरेगा का मजदूरी भी अपर्याप्त है। उन्होने मनरेगा मजदूरी को दैनिक 600 रूपये करने का मांग की है।
श्रमिकों का नहीं हुआ पंजीयन
मजदूर नेता ने कहा कि दुर्ग जिले में भारी संख्या में निर्माण मजदूरों का पंजीयन नही हुआ है और पंजीकृत मजदूरों को योजनाओं का लाभ भी नहीं मिला है। नवीनीकरण की जानकारी के अभाव में अनेक मजदूरों का पंजीयन निरस्त हो रहा है।
यूनियन की ओर से मजदूरों के बीच जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी तारतम्य में आज उमरपोटी में निर्माण श्रमिकों के बीच परचा वितरण और बैठक कर मजदूरों को संगठित होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष का आव्हान किया गया।
आज के अभियान में मुख्य रूप से सुखरंजन नंदी, डीवीएस रेड्डी, श्रवण कोसरे, आत्मा राम , हेमलाल यादव, मोना साहू, विद्या साहू, पूर्णिमा गायकवाड़, हेमलता यादव सहित बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित थे।
