
दुर्ग न्यूज, 6 मई। सीटू के प्रतिनिधि टीवीएस रेड्डी एवं अशोक खातरकर ने चार्टर्ड अकाउंटेंट विजय कुमार से बात करने के बाद कर्मियों से कहा है कि इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि वे इनकम टैक्स पोर्टल में जाकर खुद ऑपरेट कर इनकम टैक्स भर सकते हैं तो नए अथवा पुरानी इनकम टैक्स रिज्यूम अर्थात कर व्यवस्था में अपनी गणना करने के पश्चात किस व्यवस्था में इनकम टैक्स देना है यह स्वयं चुन सकते हैं अन्यथा किसी जानकार अथवा चार्टर्ड अकाउंटेंट के पास जाकर आयकर रिटर्न भरवा सकते हैं हालांकि दो-दो व्यवस्थाएं सामने रहने पर घबराहट होना स्वाभाविक है किंतु इन व्यवस्थाओं को बारीकी से पढ़ने की आवश्यकता है जिससे खुद तय कर पाएंगे कि उन्हें कौन सी व्यवस्था में आयकर रिटर्न भरना है।

वेतनभोगी कर्मी हर साल चुन सकते हैं नई या पुरानी कर व्यवस्था
सीटू प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए चार्टर्ड अकाउंटेंट विजय कुमार ने बताया कि व्यापारी वर्ग के लिए यह बाध्यता है कि वह एक बार यदि नई व्यवस्था में आयकर रिटर्न भरने के लिए चुनाव करते हैं तो वे पुराने व्यवस्था में वापस नहीं जा सकते किंतु वहीं आयकर देने वाले वेतन भोगी कर्मी हर साल यह तय कर सकते हैं कि उन्हें इस साल नए अथवा पुराने किस व्यवस्था से आयकर रिटर्न भरना है अर्थात कोई कर्मी इस वर्ष नई व्यवस्था में यदि आयकर भरता है एवं अगले साल महसूस करता है कि वह पुरानी व्यवस्था में आयकर भरने से ज्यादा फायदे में रहेगा तो वह नई व्यवस्था से पुरानी व्यवस्था में जा सकता है। वही उसके अगले साल उसे महसूस होता है कि नई व्यवस्था में आयकर भरना ज्यादा फायदेमंद है तो वहां फिर नई व्यवस्था में आकर आयकर रिटर्न भर सकता है इस तरह वह हर साल आयकर रिटर्न भरने के लिए व्यवस्था चुन सकता है वही यह चुनाव करने की व्यवस्था व्यापारी वर्ग के लिए नहीं है।

क्या है पुरानी टैक्स पद्धति
पुरानी टैक्स पद्धति में ₹2.5 लाख तक कोई इनकम टैक्स नहीं लगता है। ₹2.5 लाख से ₹3 लाख तक 5%, ₹3 लाख से ₹10 लाख तक 20%, एवं ₹10 लाख से ऊपर 30% इनकम टैक्स लगता है इस पद्धति में 80सी के तहत सीपीएफ, वीपीएफ, पीपीएफ, एजुकेशन फीस जैसे विभिन्न मदों पर 1.5 लाख तक की छूट मिलती है हाउसिंग लोन के ब्याज पर अधिकतम दो लाख तक सीधा ग्रास से घटाने की छूट, 80जी के तहत दिए गए डोनेशन को सीधा ग्रास से घटाने की छूट, एचआरए, एलटीए पर छूट, मेडिकल प्रीमियम पर 25 हजार तक सीधा ग्रास से घटाने की छूट, एजुकेशन लोन के ब्याज को सीधा ग्रास से घटाने की छूट प्राप्त है जिसका कर्मी भरपूर लाभ ले सकते हैं।
क्या है नई टैक्स पद्धति
नई टैक्स पद्धति के तहत ₹3 लाख तक कोई टैक्स नहीं लगता है। ₹3 लाख से ₹6 लाख तक 5%, ₹6 लाख से ₹9 लाख तक 10%, ₹9 लाख से ₹12 लाख तक 15%, ₹12 लाख से ₹15 लाख तक 20% एवं ₹15 लाख से ऊपर 30% इनकम टैक्स लगता है। इस नए पद्धति में कोई छूट का प्रावधान नहीं है केवल सरकार द्वारा घोषित ₹50 हजार रूपये स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया गया है।
सीटू नेता ने कहा कि हर साल आयकर कटता है किंतु हमें वित्त वर्ष समाप्त होने के बाद आयकर रिटर्न भरना पड़ता है। प्रबंधन फिलहाल यह पूछ रहा है कि आप नई व्यवस्था के तहत आयकर कटवाना चाहते हैं या पुरानी व्यवस्था के तहत आयकर कटवाना चाहते हैं। तय कर बता दें लेकिन वास्तविकता यह है कि आप किसी भी पद्धति से आयकर कटवाएं आप रिटर्न भरते समय जिस पद्धति को चुनेंगे उसी के तहत आपका रिटर्न भरा जाएगा एवं उसी पद्धति के अनुसार निर्धारित होने वाले टैक्स आयकर विभाग में जमा होगा बाकी पैसा कर्मी रिफंड ले सकेंगें।
