
दुर्ग न्यूज़, 6 दिसंबर। “विश्व मृदा दिवस” पर कृषि विज्ञान केंद्र, अंजोरा एवं पारादीप फास्फेट लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि डॉ.आरआरबी सिंह कुलपति, दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय थे। अध्यक्षता डॉ. संजय शाक्य, निदेशक विस्तार शिक्षा ने की। विशिष्ट अतिथि अतुल पांडे क्षेत्रीय मुख्य प्रबंधक पारादीप फास्फेट लिमिटेड थे।

इस अवसर पर कुलपति डॉ. सिंह ने कहा कि कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करना आवश्यक है। आवश्यकता से अधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से एक निश्चित सीमा तक की उपज बढ़ती है परंतु मृदा स्वास्थ्य खराब होता हैं। किसान जैविक एवं प्राकृतिक खेती के माध्यम से टिकाऊ खेती कर विषरहित अन्न उपजा सकते हैं। डॉ.संजय शाक्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि कृषकों को मृदा स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करने वर्ष 2014 से प्रतिवर्ष 5 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस मनाया जाता है। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने में सूक्ष्मजीवों के महत्व एवं उनके कार्यों के बारे में बताया। श्री पांडे ने बताया कि स्वस्थ मृदा में तीन से आठ प्रतिशत ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा होनी चाहिए उन्होंने फसल उत्पादन के लिए सूक्ष्म एवं मुख्य पोषक तत्वों के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी. के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर सुशील कुमार सिंह विपणन अधिकारी पारादीप फास्फेट लिमिटेड उपस्थित रहे। कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. विकास खुणे एवं मृदा विशेषज्ञ डॉ.उमेश कुमार पटेल द्वारा मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने हेतु मृदा परीक्षण एवं संतुलित मात्रा में खाद एवं उर्वरकों के उपयोग की जानकारी दी। साथ ही विशेषज्ञ डॉ. रोशन लाल साहू ने प्राकृतिक खेती के घटक जीवामृत एवं बीजामृत बनाने की विधि का प्रयोगिक प्रदर्शन आमटी, आलबरस एवं अंजोरा से आए कृषक एवं कृषक महिलाओं के समक्ष किया गया। मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ.एसके थापक विषय वस्तु विशेषज्ञ द्वारा किया गया। यह जानकारी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. दिलीप चौधरी द्वारा दी गई।

