बिना विभाग की मंजूरी के काम निजी हाथों में सौंपा; हसील में दलालों का कब्जा | entrusted the work in private hands without the approval of the department; possession of brokers in Hasil

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बैकुंठपुर27 मिनट पहले

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कोरिया जिला मुख्यालय व पटना तहसील कार्यालय में राजस्व से संबंधित मामलो के दस्तावेजों का काम अनधिकृत रुप से निजी कर्मी विभिन्न शाखा में कर रहे है। बाबूओं के दफ्तर दलालों के हवाले कर दिया गया है। इससे पक्षकारों को परेशानी हो रही है। दैनिक भास्कर ने हफ्ते भर तहसील कार्यालय की व्यवस्था को देखा। इसमें पता चला कि जिम्मेदारों की कुर्सी पर बैठकर निजी लोग सरकारी कामकाज कर रहे है। कुछ को भनक लगी तो वे कुर्सी छोड़कर चले गए।

तहसील कार्यालयों में प्राइवेट कर्मचारियों के कार्य न करने और रजिस्टर में इंट्री किए बिना समय पर कुर्सी नहीं छोड़ने को लेकर सरकार के सख्त निर्देश हैं। बावजूद इसके जिले के तहसील कार्यालयों में लापरवाही बरती जा रही है। अफसरों ने कर्मचारियों के साथ यहां निजी लोग काम कर रहे है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि बैकुंठपुर तहसील कार्यालय में जिम्मेदारों की कुर्सी पर बैठकर निजी कर्मी सरकारी कार्य का संचालन कर रहे है। यही नहीं कम्प्यूटर ऑपरेट से लेकर लेखापाल की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

रसीद एंट्री कार्य प्राइवेट कर्मी करते नजर आए। नेम स्टैंड पर दर्ज नाम पर सवाल करने पर उन्होंने कहा कि वह वे नहीं हैं। इस दौरान तमाम दस्तावेज मेज पर रखे मिले। इसी तरह अन्य कुछ पटलों पर भी प्राइवेट कर्मी काम करते दिखे। पटना तहसील में भी प्राइवेट कर्मी की तहसील के रिकॉर्ड को मेंटेन कर रहे है।

लापरवाही- निजी हाथों सरकारी फाइल, सुरक्षा को लेकर खतरा
जिला प्रशासन और राजस्व के अधिकारी जनता से जुड़े मामलों को लेकर कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा तहसील के लैंड रिकॉर्ड रुम और बाबूओं के चेम्बर में पहुंचकर लगाया जा सकता है। यहां सुबह से शाम तक दलाल सक्रिय रहते हैं। जिस कारण जमीन से जुड़े दस्तावेज गायब होने का डर बना रहता है। ग्रामीणों ने कहा कि इनसे कुछ रुपए देकर महत्त्वपूर्ण दस्तावेज हासिल की जा सकती है।

स्टाफ की कमी से प्राइवेट कर्मचारी रखे
स्टाफ की कमी को देखते हुए क्लर्क व बाबूओं ने ही प्राइवेट लोग रख लिए है। स्टाफ वहां मिले न मिले लेकिन प्राइवेट लोग वहां जरूर मिलेंगे। बैकुंठपुर में हेमंत राजवाड़े, देवेंद्र जायसवाल, जया देवांगन निजी तौर पर काम कर रहे हैं। वहीं फारूख अंसारी ने अपने बेटे को कामकाज निपटाने के लिए वहां रखा है। पटना में संजीव राजवाड़े हैं।

दफ्तरों में ग्रामीणों से काम के एवज में लिए जाते हैं रुपए
सरकारी दफ्तरों में प्राइवेट व्यक्ति के काम करने से नुकसान सरकार को तो है ही। साथ ही भ्रष्टाचार भी बढ़ता है, क्योंकि प्राइवेट व्यक्ति वहां पर कम के बदले पैसे लेते है। शिकायककर्ताओं की ओर से कई बार तहसील में बैठे प्राइवेट व्यक्तिों को हटाने की मांग की गई है। पटना तहसील में निजी कम्प्यूटर ऑपरेटर संजीव राजवाड़े को हटाने की शिकायत कलेक्टर कोरिया समेत सरगुजा संभाग आयुक्त से ग्रामवासियों ने की थी।

तहसीलदार ने कहा- टाइपिंग के लिए रखा है निजी कर्मी
पटना तहसीलदार समीर शर्मा ने बताया कि बाबू के सहयोग करने टाइपिंग वर्क के लिए एक लड़के को रखा गया है। उसे हटाने की शिकायत आई थी, लेकिन उसमें भी एक व्यक्ति के द्वारा ही कई ग्रामीणों का हस्ताक्षर कर शिकायत की गई थी। ऐसी ही एक शिकायत सामने आई है।

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