12 करोड़ 36 लाख की शक्कर खा गए अफसर, BJP नेताओं का दावा हिसाब में की गई बड़ी हेरफेर | Sugar scam in Chhattisgarh twelve million BJP’s allegation

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रायपुरएक घंटा पहले

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भारतीय जनता पार्टी का दावा है कि प्रदेश में बड़ा शक्कर घोटाला हुआ है। इसका दावा भाजपा के भारतीय जनता पार्टी सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक शशिकांत द्विवेदी ने किया है। द्विवेदी के साथ इस मसले पर मीडिया को जानकारी देने सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रभारी देवजी भाई पटेल भी सामने आए। इन नेताओं ने बताया कि कुछ अफसरों ने मिलकर बड़ी गड़बड़ी की है और 12 करोड़ की शक्कर खा गए, यानी की स्टॉक में अनियमित्ता करके पैसे कमाए।

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मामला सूरजपुर जिले के केरता ग्राम में स्थित मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाने से जुड़ा है। शक्कर कारखाने में लगातार शक्कर स्टॉक में कमी आने संबंधी शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए छत्तीसगढ़ शासन के सहकारिता मंत्रालय ने कुछ महीने पहले जांच दल का तो गठन किया। मगर इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। भाजपा नेताओं का दावा है कि इस जांच दल में अपर पंजीयक एवं जांच अधिकारी एच के नागदेव और सहायक पंजीयक एवं सहायक जांच अधिकारी विकास खन्ना शामिल थे।

भारतीय जनता पार्टी सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक शशिकांत द्विवेदी ने बताया कि शक्कर कारखाने के गोदामों में शक्कर के भौतिक सत्यापन में जांच दल द्वारा कई कमियां पाई गई। जैसे कारखाने द्वारा शक्कर की बोरियों की स्टैकिंग वैज्ञानिक तरीके से नहीं की गई। गोदाम प्रभारी द्वारा यह जानकारी दी गई कि बोरियों में दबकर एक मजदूर की मौत भी हो चुकी है। जानबूझकर बारदानों को ऐसे जमाया गया है जिससे उनकी गणना कर पाना संभव ना हो । ताकि स्टॉक में गड़बड़ी की जा सके

मोलासेस बना ही नहीं तो स्टॉक कहां से आया
भाजपा का आरोप है कि कारखाने के रजिस्टर में 28 अप्रैल 2021 को अचानक 2320 मिo टन मोलासेस(शीरा) का अतिरिक्त स्टॉक दर्शाया गया। ऐसा एक दिन में हो पाना मुमकिन ही नहीं है। कारखाने के दस्तावेज के अनुसार दिनांक 22 मार्च 2021 के बाद मोलासिस का उत्पादन रोक दिया गया था। कारखाने के दस्तावेजों के आधार पर ही रिकॉर्डेड मोलासिस की मात्रा में भौतिक सत्यापन में 1641 मिट्रिक टन मोलासिस अधिक पाई गई।
मोलासिस के संबंध में भारत सरकार को भेजी जाने वाली रिपोर्ट और दी गई जानकारी में कारखाने के उत्पादन में भारी अंतर है। इसी प्रकार पीपी बैग की जानकारी जो दी गई वह भ्रामक है। भाजपा की ओर से कहा गया है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि कारखानों द्वारा दस्तावेजों के मेंटनेंस में हेरफेर,गड़बड़ी हुई और लापरवाही बरती गई है।

भाजपा नेताओं ने कहा है कि कारखाने में स्टॉक जांचा गया। रिकॉर्ड के मुताबिक जितनी शक्कर होनी चाहिए थी उतनी नहीं थी। ईआरपी सॉफ्टवेयर की जांच में पता चला है कि 12 करोड़ 36लाख 38हज़ार कीमत की शक्कर की कमी पाई गई। शक्कर की कमी के लिए उक्त सहकारी शक्कर कारखाना के प्रबंध संचालक ,महाप्रबंधक, आदि को जांच दल द्वारा जिम्मेदार ठहराया गया है। कारखाने के प्रबंध संचालक तथा महाप्रबंधक ने घोर लापरवाही करते हुए सुनियोजित ढंग से यह कांड किया है। मगर इनपर कार्रवाई नहीं की गई। अब भाजपा इन पदाधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रही है।

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